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Persistent genital arousal disorder in women: कभी-कभी महिलाएं (women) बिना यौन उत्तेजना (Sexual arousal) और बिना यौन संबंध (sexual relationship) बनाए अचानक चरमोत्कर्ष यानी ऑर्गेज्म का अनुभव कर लेती हैं. न तो उस समय उसे यौन संबंध बनाने की इच्छा (Desire) होती है और न ही वह किसी के साथ सेक्शुअल रिलेशन बनाती है. इसके बावजूद वह अचानक ऑर्गेज्म (orgasm) तक पहुंच जाती है. अगर किसी महिला में इस तरह के लक्षण हैं तो यह कोई आनंद (Pleasure) का अनुभव नहीं है बल्कि यह एक विकार है जिसे पर्सिसटेंट जेनाइटल अरॉसल डिसऑर्डर (Persistent genital arousal disorder -PGAD) कहते हैं. यह आमौतर पर महिलाओं में होने वाली बेहद अजीब बीमारी है. हालांकि यह कोई लाइफ थ्रेटनिंग बीमारी नहीं है लेकिन इससे महिलाएं मनोवैज्ञानिक उलझनों का शिकार हो जाती हैं. पीजीएडी के कारण महिलाओं को फिजिकल पेन, तनाव (Stress) और मनोवैज्ञानिक जटिलताओं से गुजरना पड़ता है. पीजीएडी के अनुभव से गुजरने वाली महिलाओं के जननांग में गीलापन, वजाइना में सूजन, हिप और पैरों में दर्द रहता है. हालांकि महिला इस बात से अंजान रहती हैं. उन्हें यह पता नहीं रहता कि ये सब क्यों हो रहे हैं.

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क्या है इस पीजीएडी के लक्षण
मेडिकल न्यूज टूडे के मुताबिक पीजीएडी के समय अचानक महिला के प्राइवेट पार्ट में सेंसेशन होने लगता है. इसके अलावा प्राइवेट पार्ट में खुजली होने लगती है और उसपर दबाव पड़ने लगता है. साथ ही किसी चीज के प्रहार का अनुभव करती है. जलन और चुभन भी होने लगती है. जब तक वह ऑर्गेज्म तक नहीं पहुंचती तब तक ये चीजें होती रहती हैं, फिर अचानक वह ऑर्गेज्म की तीव्रता का अनुभव कर लेती है. इसके बाद उन्हें कई तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ता है.

क्या-क्या परेशानियां झेलनी पड़ती हैं
अगर कोई महिला पीजीएडी का लगातार अनुभव कर रही हैं या इसका इलाज नहीं करा रही हैं तो उनमें कई तरह की जटिलताएं आने लगती हैं. वह एंग्जाइटी, डिप्रेशन, घबड़ाहट, दुख, निराशा, अपराधबोध और अनिद्रा से जूझने लगती हैं. अगर किसी महिला में यह बीमारी लगातार होने लगे तो वह बहुत ज्यादा परेशानी में चली जाती हैं. उसका यौन सुख पर से विश्वास उठता चला जाता है और जब वह वास्तविक ऑर्गेज्म की ओर बढ़ती हैं तो यह सुखद अनुभव उनके लिए दर्द का एहसास दिलाता है.

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कारण क्या है
हालांकि अब तक पीजीएडी का सही से पता नहीं लगाया जा सका है. यौन उत्तेजना, मास्टरबेशन, एंग्जाइटी और स्ट्रेस इसके कारण हो सकते हैं लेकिन ये लक्षण नहीं भी हों तो भी पीजीएडी हो सकता है. कुछ रिसर्च में तारलोव सिस्ट (Tarlov cysts ) को इसका कारण माना गया है. हालांकि इसका भी कोई पुख्ता प्रमाण नहीं है.
क्या है इलाज
अब तक इस बीमारी को कंफर्म करने के लिए कोई टेस्ट विकसित नहीं हो सका है न ही इससे छुटकारा पाने के लिए किसी दवा को ईजाद किया गया है. कुछ मनोवैज्ञानिक थेरेपी जैसे कि Cognitive Behavioral Therapy -CBT) से इसका इलाज किया जा सकता है.

Tags: Health, Lifestyle, Women



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