[ad_1]

New weapon to combat Bacteria : बैक्टीरिया का एंटीबायोटिक प्रतिरोधी (Antibiotic Resistant Bacteria) होना कई बीमारियों के इलाज में जटिलताएं (Complications) पैदा कर रहा है. यही वजह है कि पिछले 50 सालों में डेवलप की गई कई प्रकार की मेडिसिन अपना पूरा असर नहीं दिखा पा रही हैं. लेकिन अब इस स्थिति से निपटने के लिए स्वीडन के कारोलिंस्का इंस्टीट्यूट (Karolinska Institutet), उमिया यूनिवर्सिटी (Umea University) और जर्मनी की यूनिवर्सिटी ऑफ बॉन (University of Bonn) के साइंटिस्टों ने मॉलीक्यूल (Molecule) का एक ऐसा नया ग्रुप खोजा है, जिसमें कई एंटीबायोटिक प्रतिरोधी बैक्टीरिया को मारने (एंटीबैक्टीरियल) के गुण हैं. इस खोज से कम से कम साइड इफेक्ट वाले प्रभावी एंटीबायोटिक्स विकसित करने में मदद मिल सकती है. ये स्टडी साइंज जर्नल ‘पीएनएएस (PNAS)’ में प्रकाशित हुई है. आपको बता दें कि बैक्टीरियल डिजीज (Bacterial Diseases) के ट्रीटमेंट में बैक्टीरिया का एंटीबायोटिक प्रतिरोधी/बाधक (Resistant) होते जाना एक गंभीर संकट बनता जा रहा है. ऐसे में नए एंटीबैक्टीरियल पदार्थो की खोज एक बड़ी जरूरत बन गई है.

बीमारियों के इलाज में इस्तेमाल किए जा रहे ज्यादातर एंटीबायोटिक बैक्टीरिया (antibiotic bacteria) कोशिका दीवार (cell wall) बनाने की क्षमता को बाधित करने का काम करता है, जिससे बैक्टीरिया का विखंडन (Fragmentation) शुरू हो जाता है. इसके अलावा ज्ञात पेनिसिलिन (penicillin), जो एंजाइम को दीवार बनाने से रोकता है, डेप्टोमाइसिन जैसे नए एंटीबायोटिक्स या हाल ही में विकसित टेक्सोबैक्टिन लिपिड-2 (Teixobactin Lipid-2) जैसे स्पेसिफिक मॉलीक्यूल को बांधते हैं.

बैक्टीरिया कैसे बनाता है सेल वॉल?
सेल वॉल (Cell Wall) तैयार करने के लिए सभी बैक्टीरिया को लिपिड-2 की जरूरत होती है. एंटीबायोटिक्स, जो इस सेल वॉल के बिल्डिंग ब्लॉक से जुड़ते हैं, ये आमतौर पर बहुत बड़े और जटिल मॉलीक्यूल्स होते हैं, इसलिए कैमिकल मैथड से उसमें बदलाव करना बहुत कठिन होता है. ये मॉलीक्यूल्स बीमारी पैदा करने वाले बैक्टीरिया के एक ग्रुप के प्रति निष्क्रिय भी होते हैं. ये एक अतिरिक्त भित्ति या बाहरी झिल्ली (एक तरह की दीवार) से घिरे होते हैं, जो एंटीबैक्टीरियल पदार्थो को अंदर घुसने से रोकते हैं.

क्या कहते हैं जानकार
कार्लोनिस्का इंस्टीट्यूट (Karolinska Institutet) में डिपार्टमेंट ऑफ माइक्रोबायोलॉजी, ट्यूमर एंड सेल बायोलॉजी (Department of Microbiology, Tumor and Cell Biology) की प्रोफेसर बिरगिट्टा हेनरिक्स नार्मार्क (Birgitta Henriques Normark) बताती हैं, ‘इसलिए नए एंटीबायोटिक्स में लिपिड-2 को सबसे ज्यादा निशाना बनाने की कोशिश होती है. हमने ऐसे पहले सूक्ष्म एंटीबैक्टीरियल कंपाउंड की पहचान की है, जो लिपिड मालीक्यूल्स को बांधने का काम करता है. हमने अपने अध्ययन में पाया कि म्यूटेंट (उत्परिवर्तित) बैक्टीरिया में भी इसका प्रतिरोध नहीं होता है. यह बड़ा ही उत्साहजनक है.’

कैसे हुई स्टडी
स्वीडन के कारोलिंस्का इंस्टीट्यूट (Karolinska Institutet) और उमिया यूनिवर्सिटी (Umea University) में की गई इस रिसर्च में साइंटिस्टों ने निमोनिया (Pneumonia) रोग पैदा करने वाले न्यूमोकोकी (pneumococci) पर बड़ी संख्या में केमिकल कंपाउड का प्रयोग किया. इस तरीके से चुने गए कुछ एक्टिव कंपाउंड में से टीएचसीजेड (THCZ) ग्रुप के मॉलीक्यूल्स में विशिष्टता पाई गई कि ये लिपिड-2 के साथ चिपककर बैक्टीरिया को सेल वॉल बनाने से रोकता है. ये मॉलीक्यूल्स शुगर कैप्सूल के निर्माण को भी रोकता है, जिसकी जरूरत न्यूमोकोकी (pneumococci) को इम्यून सिस्टम से बचकर बीमारी पैदा करने के लिए होती है.

यह भी पढ़ें- लंबे समय तक हाई बीपी है रिस्की, दोगुना बढ़ जाता है मिर्गी का खतरा: स्टडी

स्टडी का नतीजा
रिसर्चर्स के अनुसार, इस सूक्ष्म मॉलीक्यूल की खासियत ये है कि उसे केमिकली (chemically) बदला भी जा सकता है. इसलिए, उम्मीद की जा रही है कि इसके जरिये टीएचसीजेड (THCZ) को बदला जा सकता है, जिससे एंटीबैक्टीरियल इफैक्ट बढ़ जाएगा और ह्यूमन सेल्स पर उसका साइड इफैक्ट भी कम होगा. लैब में किए गए प्रयोगों में पाया गया है कि टीएचसीजेड- एंटीबायोटिक प्रतिरोधी (THz- antibiotic resistant) कई बैक्टीरिया पर प्रभावी रहा है. इस तरह का प्रयोग एमआरएसए  (MRSA) यानी मेथिसिलिन-रेसिस्टेंट स्टैफीलोकोकी (Methicillin-resistant staphylococci), वैंकोमाइसिन-रेसिस्टेंट एंटेरोकोकी (VRE) और पेनिसिलिन-रेसिस्टेंट न्यूमोकोकी (PNSP) जैसे बैक्टीरिया पर हुआ है.

यह भी पढ़ें- रोजाना 45 मिनट की एक्सरसाइज कम कर देगी कैंसर का रिस्क: स्टडी

सूजाक (Gonorrhea) पैदा करने वाले गोनोकोकी (gonococci) तथा टीबी के कारक माइकोबैक्टीरिया के खिलाफ भी यह प्रभावी पाया गया है. प्रयोग के दौरान ऐसा कोई बैक्टीरिया नहीं मिला, जो टीएचसीजेड के प्रति रेसिस्टेंट विकसित किया हो. रिसर्चरस का कहना है कि अब वे इस बात की कोशिश में लगे हैं कि कुछ ऐसा किया जा सके ताकि टीएचसीजेड मॉलीक्यूल (THCZ Molecule) मल्टी रेसिस्टेंट बैक्टीरिया की बाहरी कोशिकीय झिल्ली (outer cellular membrane) को भी भेद सके.

Tags: Health, Health News



[ad_2]

Source link

Leave a Reply

Your email address will not be published.