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Plant Based Meat And Milk: क्या आप जानते हैं कि अब मीट और दूध के लिए पशुओं के बिना भी काम चल सकता है? जी हां, ऐसा संभव है. दुनिया के बहुत से देशों में अब खाने की कई चीजें शाकाहारी प्रोडक्ट्स से बनने लगी हैं. दैनिक भास्कर अखबार ने ‘द इकोनोमिस्ट (The Economist)’ के हवाले से एक रिपोर्ट में ये बताया है कि दुनिया में पौधों से बने दूध और मीट (Meat Milk Made From Plants) का शाकाहारी विकल्प पेश करने वाली कंपनियों का कोरोबार तेजी से बढ़ रहा है. इस रिपोर्ट में ये भी लिखा है कि अमेरिका और यूरोप के कई देशों के रेस्टोरेंट्स में बर्गर, हॉटडॉग और सॉसेज (मीट के कीमे से बना फूड) जैसे कई तरह के फास्ट फूड्स अब पूरी तरह से शाकाहारी चीजों से बनने लगे हैं.

इस रिपोर्ट में बताया गया है कि इन चीजों को अब गाय, भैंस या किसी अन्य पशु के मीट से नहीं बल्कि पौधों द्वारा तैयार किया जाता है. उदाहरण के तौर पर चिकन जैसा दिखने वाला व्हाइट मीट मटर से तैयार किया जाता है. ऐसा बताया गया है कि अब ये सारी चीजें लैब में नहीं बल्कि फास्ट फूड कंपनियों में ही तैयार हो रही हैं.

कैसे तैयार किया जाता है शाकाहारी दूध?
अभी तक सोया और अन्य पौधों से निर्मित दूध केवल शाकाहारी लोगों और लैक्टोज इनटॉलेरेंट लोगों तक सीमित था. लेकिन अब ये दूध दुनिया के कॉफी शॉप और ग्रोसरी स्टोर्स पर भी उपलब्ध है. इसका बाजार तेजी से बढ़ रहा है. अब डेनोन (Danone) और छोबानी (Chobani) जैसी कंपनियां पौधों पर आधिरत दूध बनाने लगी हैं. इनमें गाय के दूध से ज्यादा फाइबर होता है.

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पौधों से बने दूध का कारोबार
इस रिपोर्ट के अनुसार, दुनिया में पौधों से बने दूध का कारोबार 1.48 लाख करोड़ रुपए तक का हो गया है. साल 2020 की बात करें तो अकेले अमेरिका की मिल्क मार्किट में ही पौधों से बने दूध का हिस्सा 15 प्रतिशत रहा था.

ऐसे बनता है शाकाहारी मीट
2009 में शुरू हुई एथन ब्राउन (Ethan Brown) की कंपनी बियोंड मीट (Beyond Meat), इसके वैज्ञानिकों ने शाकाहारी मीट बनाने के लिए हेनरी फोर्ड (Henary Ford) की तकनीक को अपनाया. उन्होंने पशुओं के मांस को देखकर उसके कॉम्पोनेंट्स (components) यानी घटकों के स्थान पर पौधौं से निकाले गए तत्व डालकर ऐसा किया. सबसे पहले उन्होंने मटर और सोयाबीन से प्रोटीन निकाला, फिर उसे आलू के स्टार्च और नारियल तेल जैसे फैट्स से मिलाया. इसके बाद उसमें नमक और फ्लेवर मिलाकर उसका टेस्ट मीट जैसा बनाया.

शाकाहारी मीट का कारोबार
शाकाहारी दूध के साथ-साथ दुनिया में मीट का शाकाहारी विकल्प पेश करने वाली कंपनियों का कारोबार भी तेजी से बढ़ा है. इसका अंदाजा इससे लगाया जा सकता है कि साल 2009 से शाकाहारी मीट का कारोबार शुरू करने वाले वाली एथन ब्राउन की कंपनी बियोंड मीट अब 80 से ज्यादा देशों में अपने प्रोडक्ट बेचती है. इसने पिज्जा हट और McDonald’s जैसे फास्ट फूड चेन पर अधिक ध्यान दिया है. साल 2019 में शेयर बाजार में आई इस कंपनी का मूल्य लगभग 50 हजार करोड़ रुपए का हो गया था. इस शाकाहारी मीट के कारोबार में बियोंड मीट का मुकाबला इंपॉसिबल फूड्स (Impossible Foods) से है, जिसका अमेरिका, कनाडा और ऑस्ट्रेलिया जैसे देशों में साम्राज्य फैला है. आज दोनों कंपनियों के प्रोडक्ट्स आपको अमेरिका के लगभग हर सुपर मार्किेट में मिल जाएंगे.

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बियोंड मीट की सफलता को देखते हुए अब मीट प्रोडक्ट्स बनाने वाली कई कंपनियों ने शाकाहारी प्रोडक्ट्स शुरू कर दिए हैं. इनमें कारगिल (Cargill), जेबीएस और टाइसन फूड्स (Tyson Foods) प्रमुख हैं.

1500 साल पुराना इतिहास
इस रिपोर्ट में आगे लिखा है कि पौधों की चीजों से मीट और दूध बनाना कोई नई या अनोखी बात नहीं है. असल में इनमें पौधों और जानवरों के बुनियादी तत्वों जिनमें प्रोटीन, कार्बोहाइड्रेट और फैट शामिल हैं, उन्हें नए सिरे से मिलाने का प्रोसेस है. ऐसा बताया जाता है कि एशिया में बौद्ध धर्म के लोग 1500 साल से ज्यादा समय से विभिन्न घटकों को मिलाकर नकली मीट बनाते आए हैं. चीन में तो कई शताब्दी से सोयाबीन का दूध बनता है. आपको बता दें कि हेनरी फोर्ड ने लिखा था कि जिस अनाज को गाय खाती है, उसे मिलाकर नेचुरल मिल्क बनाना संभव है. कहा जा सकता है कि उनके सुझाव पर अमल हो रहा है.

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