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Organ Transplant Increases Cancer Risk : ऑर्गन ट्रांसप्लांट (Organ Transplant) यानी अंग प्रत्यर्पण को लेकर हुई एक नई रिसर्च में पता चला है कि इससे फौरी तौर पर तो लाइफ बचाई जा सकती है, लेकिन इंफेक्शन और अन्य बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है. दैनिक जागरण में छपी रिपोर्ट के मुताबिक स्टडी में ये पाया गया है कि ट्रांसप्लांट कराने वाले लोगों में कैंसर का रिस्क बढ़ जाता है. ऑर्गन ट्रांसप्लांटेशन के बाद कैंसर क्यों हो जाता है? ये सवाल वैज्ञानिकों को लिए सालों से पहली बना हुआ है. इसी का जवाब ढूंढने के लिए ये अहम स्टडी की गई है, जिसे अमेरिकन कैंसर सोसाइटी (American Cancer Society ) की मैगजीन ‘कैंसर‘ में छापा गया है.

स्टडी का स्वरूप
नेशनल कैंसर इंस्टीट्यूट (NCI) की रिसर्चर ऐनी मिशेल नून (Anne-Michelle Noone) और उनकी सहयोगियों ने इस स्टडी के लिए अमेरिका में 1987 से लेकर 2014 तक के ऑर्गन ट्रांसप्लांट और कैंसर के रजिस्ट्री डाटा का विश्लेषण किया. जिसमें अलग-अलग आयु वर्ग के लोगों में कई तरह के ऑर्गन ट्रांसप्लांट किए गए थे. स्टडी में ये आंकलन किया गया कि ऑर्गन ट्रांसप्लांट कराने वाले लोगों की एवरेज लाइफ में कैंसर के कारण कितनी कमी आई.

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स्टडी में क्या निकला
स्टडी के दौरान रिसर्चर्स ने ये पाया कि साल 1987 से 2014 तक ऑर्गन ट्रांसप्लांट कराने वाले 2 लाख 21 हजार 962 लोगों में से 13 हजार 74 लोगों (5.9 प्रतिशत) में ट्रांसप्लांट सर्जरी होने के 10 सालों के अंदर ही कैंसर पनप गया. इस बीमारी के कारण उनके जीवनकाल में औसतन 2.7 साल की कमी आई है. एनालिसिस के अनुसार, अन्य बीमारियों के कारण लाइफटाइम में होने वाली टोटल कमी में 11 प्रतिशत के लिए कैंसर को जिम्मेदार ठहराया माना है.

फेफड़े के कैंसर का असर घातक
ऑर्गन ट्रांसप्लांट कराने वाले लोगों पर सबसे बुरा असर फेफड़े के कैंसर और नॉन-हाजकिन लिंफोमा (Non-Hodgkin lymphoma) का रहा. रिसर्च के मुताबिक इन दोनों के कारण ट्रांसप्लांट कराने वालों के जीवनकाल में 5-5 साल की कमी आई. नॉन-हाजकिन लिंफोमा एक तरह का कैंसर है, जो शरीर के लसीका तंत्र यानी लिंफेटिक सिस्टम (lymphatic system) में शुरू होता है. ये हमारे इम्यून सिस्टम का हिस्सा है, जो रोगाणुओं से लड़ने का काम करता है.

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इस बीमारी में लिंफोसाइट्स नाम के व्हाइट ब्लड सेल्स असामान्य रूप से बढ़ने लगते हैं और पूरे शरीर में कहीं भी ट्यूमर बना सकते हैं. स्टडी के अनुसार, यही कारण है कि फेफड़े का ट्रांसप्लांट कराने वालों को सर्जरी के बाद हुए कैंसर से सबसे ज्यादा नुकसान हुआ. उनके जीवनकाल के पांच साल कम हुए .

स्क्रीनिंग पर खास ध्यान देने की सलाह
इस रिसर्च के नतीजों के आधार पर साइंटिस्टों का कहना है कि ऑर्गन ट्रांसप्लांट कराने वाले लोगों में कैंसर के रोकथाम के लिए स्पेशल स्क्रीनिंग की सलाह दी जाती है. नॉन-हाजकिन लिंफोमा को लेकर तो बच्चों की स्क्रीनिंग पर खास ध्यान देने की जरूरत है. ऐसा ही कुछ स्मोकिंग बैकग्राउंड वाले बुजुर्गों के लंग्स ट्रांसप्लांट कराने पर ध्यान देने की जरूरत है.

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