[ad_1]

How Cancer Spread in the body : कैंसर ट्यूमर के तेजी से होने वाले फैलाव और उसके इलाज की जटिलताओं (Complications) की गुत्थी सुलझाने के लिए दुनियाभर में लगातार कोशिशें जारी हैं.  दैनिक जागरण में छपी रिपोर्ट के अनुसार, इसी क्रम में मैसाचुसेट्स इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (Massachusetts Institute of Technology) यानी एमआईटी के रिसर्चर्स ने एक ऐसी तकनीक विकसित की है, जिससे चूहों में सर्कुलेटिंग ट्यूमर सेल (circulating tumor cells) यानी सीटीसी के पैदा होने की दर और ब्लड फ्लो (ब्लडस्ट्रीम) में उसके बने रहने के टाइम का आंकलन किया जा सका है. इससे साइंटटिस्टों को यह पता करने में आसानी होगी कि विभिन्न प्रकार के कैंसर किस तेजी से शरीर में फैलते हैं.

यह रिसर्च नेचर कम्यूनिकेशंस जर्नल (Nature Communications) में छपी है. बता दें कि जब किसी बॉडी पार्ट में ट्यूमर बढ़ता है तो वह तेजी से कोशिकाएं यानी सेल्स बनाता है, ये सेल्स रक्त प्रवाह (ब्लडस्ट्रीम) में आ जाते हैं. इसके बाद ये सेल्स शरीर के दूसरे पार्ट्स तक पहुंच जाते हैं और नए ट्यूमर का निर्माण करते हैं. इसे मेटास्टैसिस (metastasis) कहते हैं.

ट्यूमरों से निकलने वाली CTC की स्टडी करने में सफल 
स्टडी के सीनियर राइटर स्काट मनालिस (Scott Manalis) ने बताया कि चूहों के बीच खून की अदला-बदली से रियल टाइम में इसका प्रत्यक्ष आंकलन (direct assessment) किया कि सीटीसी कितनी जल्दी ब्लड सर्कुलेशन में एंटर करते हैं और उन्हें साफ होने में कितना समय लगता है. अपनी नई तकनीक के जरिये रिसर्चर पैनक्रिएटिक (अग्नाशय) और फेफड़े के दो प्रकार के ट्यूमरों से निकलने वाली सीटीसी की स्टडी करने में सफल हो सके हैं.

यह भी पढ़ें- बाल झड़ने के पीछे केवल पानी, प्रदूषण या टेंशन ही नहीं, मोटापा भी है बड़ी वजह

इलाज का ट्यूमर पर कितना असर
उल्लेखनीय है कि सर्कुलेटिंग ट्यूमर सेल (सीटीसी) बहुत ही कम होते हैं. एक मिलीलीटर खून में इनकी संख्या महज एक से 10 के बीच होती है. हाल के वर्षो में रिसर्चर्स ने इन सेल्स को पकड़ने के लिए एक प्रोसेस अपनाया है, जिससे कि मरीजों के ट्यूमर के बारे में ज्यादा से ज्यादा जानकारी हासिल की जा सके. इससे डाक्टर यह भी पता कर सकेंगे कि इलाज का ट्यूमर पर कितना असर हो रहा है.

रिसर्च करने वाले स्काट मनालिस ने आगे बताया कि सर्कुलेटिंग ट्यूमर सेल्स ऐसे होते हैं, जिन्हें खून से निकाला जा सकता है और ये ट्यूमर तक जाने का रास्ता बताता है. उनका कहना है कि ये तकनीक बायोप्सी (biopsy) से बहुत ही ज्यादा आसान है.

यह भी पढ़ें- शरीर को नुकसान भी पहुंचा सकते हैं मल्टीविटामिन्स, लेने से पहले इन बातों का रखें ध्यान

रिसर्चर्स के अनुसार, चूहों में सीटीसी को पाना बहुत ही कठिन है, क्योंकि उनमें ब्लड एक मिलीलीटर से कुछ ही ज्यादा होता है. फिर भी चूहों में सीटीसी की स्टडी कर पाने में सक्षम होने से रिसर्चर्स को इस संबंध में कई सवालों के जवाब मिले कि ट्यूमर कितनी तेजी से इन्हें छोड़ता है, ब्लडस्ट्रीम में यह कितने समय तक बना रहता है और कितनी जल्दी से नया ट्यूमर बना लेता है.

चूहों पर कैसे किया गया प्रयोग
रिसर्चर्स ने एक ऐसा सिस्टम बनाया, जिससे कि ट्यूमर वाले एक चूहे से ब्लड निकाल कर हेल्दी चूहे में डाल सकें. इसके बाद एक अलग ट्यूब के जरिये हेल्दी चूहे से ब्लड को ट्यूमर वाले चूहे तक वापस पहुंचाया गया. इस तरीके से रिसर्चर्स एक घंटे से भी कम समय में दोनों चूहों के पूरे ब्लड का विश्लेषण कर सके. स्टडी के क्रम में उन्होंने तीन प्रकार के ट्यूमरों का विश्लेषण किया, जिसमें पैनक्रिएटिक कैंसर (pancreatic cancer) और स्मॉल सेल लंग कैंसर (small cell lung cancer) व नॉन-स्मॉल सेल लंग कैंसर (non-small cell lung cancer) शामिल हैं.

यह भी पढ़ें- कैसे होती है सोने से एलर्जी, जानिए आपकी स्किन को सूट करेगा कौन सा गोल्ड?

स्टडी का महत्व
इस स्टडी को करने वाले रिसर्चर्स को उम्मीद है कि इस पद्धति (method) के इस्तेमाल से यह पता लगाया जा सकता है कि विभिन्न प्रकार की दवाएं सीटीसी लेवल को किस तरह से प्रभावित करती हैं. इसके जरिये रियल टाइम में सीटीसी के कंसंट्रेशन का पता कर उचित दवा देना संभव होगा. साथ ही सीटीसी की हाफ लाइफ और उसके पैदा होने की दर को भी कंट्रोल करने की संभावना तलाशी जा सकती है.

इस प्रयोग का निष्कर्ष
रिपोर्ट के मुताबिक, इस प्रयोग के निष्कर्ष की बात करें तो तीनों तरह के कैंसर के मामलों में सीटीसी की हाफ लाइफ लगभग समान ही थी, जो 40 सेकंड से 250 सेकंड थी. जबकि उनके पैदा होने की दर में काफी अंतर था. स्मॉल सेल लंग ट्यूमर प्रति घंटे एक लाख सीटीसी पैदा कर सकता है, जबकि नॉन स्मॉल सेल लंग ट्यूमर और पैनक्रिएटिक ट्यूमर से प्रति घंटा 60 सीटीसी ही पैदा होते हैं. हेल्दी चूहे में कुछ एक हजार सीटीसी जाने के बाद मेटास्टैसिस शुरू हो गया. स्मॉल सेल लंग ट्यूमर के सीटीसी से हेल्दी चूहे के लीवर में भी समान मेटास्टैसिस हुआ.

पढ़ें Hindi News ऑनलाइन और देखें Live TV News18 हिंदी की वेबसाइट पर. जानिए देश-विदेश और अपने प्रदेश, बॉलीवुड, खेल जगत, बिज़नेस से जुड़ी News in Hindi.

[ad_2]

Source link

Leave a Reply

Your email address will not be published.