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कोरोना की दूसरी लहर के बाद दुनियाभर में Omicron Variant नाम का खतरा मंडरा रहा है। कोरोना वायरस के इस नए वेरिएंट को लेकर लगभग सभी देश अलर्ट पर हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) द्वारा कोरोना के इस नए स्वरूप बी.1.1.529 (Omicron) को  ‘चिंता वाले स्वरूप’ के रूप में नामित किया गया था।हालांकि, भारत के लिए राहत भरी खबर यह है कि इस वेरिएंट का अभी तक एक भी मामला सामने नहीं आया है। बावजूद इसके कोरोना के इस नए वेरिएंट को लेकर लोगों के मन में कई तरह के सवाल उठ रहे हैं। आइए जानते हैं ऐसे ही कुछ अहम सवालों के सही जवाब।  

क्या यह अधिक संक्रामक है?
यह अभी पता नहीं चला है। सभी वैज्ञानिकों और डब्ल्यूएचओ के विशेषज्ञों ने जो कहा है, वह यह है कि ओमीक्रोन संस्करण अधिक संक्रामक हो सकता है। इसका मतलब है कि यह पहले से मौजूद वेरिएंट की तुलना में अधिक आसानी से लोगों में फैल सकता है। एक निश्चित उत्तर पर पहुंचने के लिए आंकड़े अभी पर्याप्त नहीं हैं।

क्या ओमीक्रोन का पता लगाना संभव है?
कोविड -19 परीक्षणों के लिए लिए गए सभी नमूने जीनोम अनुक्रमण के अधीन नहीं हैं, जो व्यावहारिक रूप से संभव भी नहीं है। इसलिए चिंता है कि कई मामलों में ओमीक्रोन वेरिएंट का पता नहीं चल सकता है। हालांकि, दक्षिण अफ्रीका के सेंटर फॉर एपिडेमिक रिस्पांस एंड इनोवेशन (सीईआरआई) के निदेशक टुलियो डी ओलिवेरा ने पिछले हफ्ते कहा था कि पीसीआर परीक्षणों के माध्यम से नए संस्करण का आसानी से पता लगाया जा सकता है। लेकिन पर्याप्त सैंपलिंग नहीं होने के कारण अभी तक कोई निर्णायक जवाब नहीं मिल पाया है।

क्या यह लोगों को अधिक बीमार बनाता है?
यह भी अभी पता नहीं चला है। दक्षिण अफ्रीका की डॉक्टर एंजेलिक कोएत्जी जिन्होंने नए कोविड -19 मामलों के बारे में अधिकारियों को सचेत किया था। उन्होंने बताया कि नए स्वरूप से संक्रमित लोगों में हल्की बीमारी देखी गई है। वहीं, दक्षिणी अफ्रीका के बोत्सवाना और दक्षिण अफ्रीका से लेकर यूके और जर्मनी तक के मामले के लिए उपलब्ध डेटा के मुताबिक, ओमीक्रोन एक गंभीर बीमारी का संकेत नहीं देता।

नए स्वरूप को लेकर क्यों चिंतित हैं वैज्ञानिक?
डब्ल्यूएचओ ने कहा कि अन्य प्रकारों की तुलना में प्रारंभिक साक्ष्य इस स्वरूप से पुन: संक्रमण के बढ़ते जोखिम का सुझाव देते हैं। इसका मतलब है कि जो लोग संक्रमण से उबर चुके हैं, वे भी इसकी चपेट में आ सकते हैं। समझा जाता है कि इस नए स्वरूप में कोरोना वायरस के स्पाइक प्रोटीन में सबसे ज्यादा, करीब 30 बार परिवर्तन हुए हैं जिससे इसके आसानी से लोगों में फैलने की आशंका है।

वायरस के बारे में क्या पता है और क्या नहीं?
वैज्ञानिकों को पता चला है कि ओमीक्रोन, बीटा और डेल्टा स्वरूप सहित पिछले स्वरूपों से आनुवंशिक रूप से अलग है, लेकिन यह नहीं पता चल पाया कि क्या ये आनुवंशिक परिवर्तन इसे और अधिक संक्रामक या घातक बनाते हैं। अब तक, कोई संकेत नहीं मिले हैं कि स्वरूप अधिक गंभीर बीमारी का कारण बन सकता है। यह पता करने में संभवत: हफ्तों लग सकते हैं कि क्या ओमीक्रोन अधिक संक्रामक है और क्या टीके इसके खिलाफ प्रभावी हैं या नहीं।

क्या यह अस्पतालों पर भारी पड़ेगा?
यह अभी तक ज्ञात नहीं है कि ओमीक्रोन संस्करण डेल्टा संस्करण का व्यवहार करेगा या बीटा संस्करण के समान होगा। दक्षिण अफ्रीका में जीनोम अनुक्रमण से पता चलता है कि ओमीक्रोन ने ताजा मामलों में डेल्टा को पछाड़ दिया है। डेल्टा उस देश में सबसे प्रमुख संस्करण रहा है। लेकिन दो हफ्तों में ओमीक्रोन ने डेल्टा को पीछे छोड़ दिया है। इसका मतलब यह है कि ओमीक्रोन में अस्पतालों पर हावी होने की क्षमता है।

नए वेरिएंट पर टीका कितना प्रभावी?
दक्षिण अफ्रीका में टीकाकरण दर सिर्फ 24 प्रतिशत है। दक्षिण अफ्रीकी अधिकारियों को सतर्क करने वाले डॉक्टर ने यह भी कहा कि नए स्वरूप वाले आधे से अधिक रोगियों का टीकाकरण नहीं हुआ था। हालांकि, अब तक किसी भी टीके ने संक्रमण से सुरक्षा की गारंटी नहीं दी है। 

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