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बीते दो सालों में विश्व भर में करीब 54 लाख लोगों की मौत कोरोना के कारण हुई है। इन दो सालों में 11 करोड़ लोगों की जान कई दूसरे रोगों और कारणों से भी गई है। ऐसे में हमें सम्पूर्ण सेहत का ख्याल भी रखना होगा। जानते हैं महत्वपूर्ण जानकारियां शमीम खान की रिपोर्ट में-

पिछले दो वर्षों से पूरा विश्व कोरोना महामारी के खौफ में जी रहा है। स्थितियां थोड़ी संभलने लगती हैं तो फिर कोरोना का एक नया वैरिएंट आकर परेशानियां बढ़ा देता है। पर, यह भी समझना होगा कि केवल कोरोना का संक्रमण ही जानलेवा नहीं है, कई गंभीर बीमारियां हैं, जो मृत्यु का प्रमुख कारण हैं। कोरोना की हर जगह इतनी चर्चा रही कि पिछले दो वर्षों में लोगों ने सेहत से जुड़ी अपनी दूसरी परेशानियों पर कम ही ध्यान दिया। विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार 2019 में विश्वभर में मृत्यु के 74 प्रतिशत मामलों का कारण गैर संक्रामक रोग रहे हैं।

बचिए इन रोगों से
वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गेनाइजेशन ग्लोबल हेल्थ एस्टीमेट्स, 2020 के अनुसार, विश्व में मृत्यु के दस प्रमुख कारण ये रहे हैं- 
इस्चेमिक हार्ट डिजीजेस
स्ट्रोक
क्रॉनिक ऑब्सट्रक्टिव पल्मोनरी डिजीज
श्वसन तंत्र के निचले मार्ग का संक्रमण
न्योनटल कंडीशंस
ट्रेकिया, ब्रोंकाइटिस, लंग कैंसर
अल्जाइमर्स, डिमेंशिया और अन्य मानसिक समस्याएं  डायरियल डिजीज
डायबिटीज
किडनी रोग
वर्ष 2019 में 5 करोड़ 54 लाख लोगों ने अपनी जान गंवाई है, जिसमें से 55 प्रतिशत मौतें इन 10 प्रमुख कारणों से हुई हैं। इनमें से कई रोगों की रोकथाम और उपचार संभव है। सेहत की अनदेखी न करें। जीवनशैली व खानपान में सुधार करके हम इनमें से कई रोगों से बच सकते हैं।
इस्चेमिक हार्ट डिजीजेस
यानी हृदय से जुड़ी विभिन्न स्वास्थ्य स्थितियां। दुनिया व देश में यह मृत्यु का सबसे प्रमुख कारण है। विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार, 2019 में विश्वभर में होने वाली कुल मौतों में से 16 प्रतिशत दिल के बीमार होने से हुई हैं। कोविड-19 के बाद दिल के मरीजों में 14 प्रतिशत तक बढ़ोतरी हुई है। इनमें से अधिकतर युवा हैं, जिनकी उम्र 30-49 वर्ष है।
अपने दिल को स्वस्थ रखने वाली कई बातें हैं, जिन पर आसानी से नजर रखी जा सकती है। सही खान-पान, नियमित व्यायाम, नमक व चीनी कम खाना, वजन काबू में रखना, शराब व धूम्रपान से दूर रहना, हमें दिल के रोगों से बचा सकता है। अगर बीमारी का पारिवारिक इतिहास है तो ब्लड प्रेशर आदि की नियमित जांच करवाते रहना जरूरी है।

ब्रेन स्ट्रोक
स्ट्रोक विश्वभर में मृत्यु का दूसरा और विकलांगता का तीसरा सबसे प्रमुख कारण है। 2019 में विश्वभर में होने वाली कुल मौतों में से 11 प्रतिशत स्ट्रोक के कारण हुई थीं। स्ट्रोक तब आता है, जब मस्तिष्क को रक्त पहुंचाने
वाली नलिकाएं ब्लॉक हो जाती हैं या उनमें लीकेज होती है। इससे मस्तिष्क की कोशिकाओं को ऑक्सीजन और पोषण नहीं मिलता और वो मरने लगती हैं। तीन घंटे में उपचार उपलब्ध न होने पर विकलांगता का खतरा बढ़ जाता है।
जीवनशैली और खानपान की आदतों के कारण आज युवा भी तेजी से ब्रेन स्ट्रोक की चपेट में आ रहे हैं। स्ट्रोक के शिकार लोगों में करीब 28 प्रतिशत 65 वर्ष से कम आयु के और 10-15 प्रतिशत लोग 40 वर्ष से कम आयु के हैं। रक्त दाब को नियंत्रित रखकर और शारीरिक रूप से सक्रिय रहकर काफी हद तक स्ट्रोक से बचा जा सकता है।
कैंसर
कैंसर विश्वभर में मृत्यु का सबसे प्रमुख कारणों में से एक बनता जा रहा है। इस रोग के प्रति जागरूकता रखकर इससे होने वाले नुकसान को काफी कम किया जा सकता है। हमारे देश में कैंसर के पचास प्रतिशत से अधिक मामले तीसरी या चौथी स्टेज में सामने आते हैं, जिससे जीवित रहने की संभावना कम हो जाती है।
डब्ल्यूएचओ के अनुसार कैंसर के कुल मामलों और होने वाली मौतों का अनुपात भारत में सबसे अधिक है। कैंसर के कारण होने वाली मौतों से बचने के लिए दो चीजें सबसे जरूरी हैं। एक, स्वस्थ जीवनशैली अपनाना। दूसरा, शरीर में कोई भी असमानता दिखने पर डॉक्टर से संपर्क करना, ताकि शुरू में ही बीमारी पर पकड़ बन जाए। वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गेनाइजेशन ग्लोबल हेल्थ एस्टीमेट्स के अनुसार, ‘पहले पायदान पर स्तन, दूसरे पर फेफड़े और तीसरे पर कोलोन कैंसर है।’

लोअर रेस्पिरेटरी इंफेक्शन
पिछले दशक में लोअर रेस्पिरेटरी इंफेक्शन भारत में मृत्यु का चौथा सबसे प्रमुख कारण था। लेकिन डायग्नोसिस में सुधार आने और संक्रमण के बेहतर प्रबंधन के साथ, श्वसन मार्ग के निचले भाग के संक्रमण जैसे निमोनिया, लंग एब्सेस और एक्यूट ब्रोंकाइटिस एक पायदान नीचे आ गए हैं और मृत्यु का पांचवां सबसे प्रमुख कारण बन गए हैं। यह समस्या उम्रदराज लोगों और उन लोगों में जिनमें दूसरे संक्रमणों जैसे सीजनल इन्फ्लुएंजा के कारण इम्यून तंत्र कमजोर हो गया हो में अधिक सामान्य है। सांस फूलना, कमजोरी, बुखार, खांसी और थकान जो एक सप्ताह से अधिक रहे, जैसे लक्षण दिखाई दें तो तुरंत डॉक्टर को दिखाएं। दुनिया में कुल निमोनिया के मामलों में 44 फीसदी भारत में होते हैं।

डायबिटीज 
पिछले 20 वर्षों में डायबिटीज के मामलों में 70-80 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। भारत के स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा 2019 में जारी रिपोर्ट के अनुसार, ‘हमारे देश में डायबिटीज के मामले पिछले चार वर्षों में 11.8 प्रतिशत की दर से बढ़े हैं। अनुशासित जीवनशैली और उचित खानपान से डायबिटीज के मरीज अपने रक्त में शर्करा के स्तर पर बेहतर ढंग से काबू में कर सकते हैं। इसके अलावा इनके लिए नियमित व्यायाम करते रहना भी जरूरी है। कुछ देर टहलना, पैदल चलना जारी रहना चाहिए। मधुमेह के रोगियों को कोई भी दवा बिना डॉक्टर की सलाह के लेने से बचना चाहिए।

स्वस्थ रहेंगे तो संक्रमण से भी बच जाएंगे
कोई भी बीमारी एक दिन में नहीं होती। जब हमारे शरीर के साथ कोई समस्या होती है तो वह संकेत देता है, लेकिन अकसर हम उन संकेतों को नजरअंदाज कर देते हैं। अगर हम अपनी सेहत का ख्याल रखें तो न केवल गंभीर बीमारियों की चपेट में आने का खतरा कम हो जाएगा, बल्कि कोरोना, ओमीक्रॉन जैसे वायरसों के संक्रमण से भी बच जाएंगे या जल्दी ही रिकवर हो जाएंगे।

पहले से ही बीमार लोगों में संक्रमण का खतरा अधिक होता है। पुणे स्थित नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ वायरोलॉजी के अनुसार, जिन्हें पहले से ही कोई स्वास्थ्य समस्या है जैसे हृदय रोग, फेफड़ों की बीमारियां, डायबिटीज आदि उन्हें गंभीर संक्रमण की चपेट में आने का खतरा स्वस्थ्य लोगों की तुलना में चार गुना अधिक होता है। पूरे विश्व में कोरोना वायरस के कारण जान गंवाने वालों में अधिकतर वो लोग हैं, जो पहले से किसी बीमारी के शिकार थे।

सेहत की अनदेखी से बढ़ी ये समस्याएं
मोटापा
कोरोना के कारण लगातार लोग घर के भीतर रहे हैं। आउटडोर गतिविधियां जैसे ऑफिस या जिम जाना, खुले में व्यायाम करना या खेलना आदि न होने से मोटापे की समस्या बढ़ी है। मोटापा डायबिटीज, हृदय रोगों, कैंसर आदि का सबसे प्रमुख रिस्क फैक्टर माना जाता है। इस दौरान खान-पान की आदतों में हुए बदलावों ने भी मोटापे के लक्षणों को गंभीर किया है।

जोड़ों और रीढ़ से जुड़ी समस्याएं
इन दिनों पढ़ाई, मनोरंजन और ऑफिस से जुड़ें कामों को पूरा करने के लिए गैजेट्स पर निर्भरता बढ़ी है। घरों में प्रोफेशनल सेटअप न होने से पॉस्चर से जुड़े रोग, जोड़ और कमर दर्द से जुड़े मामले बढ़े हैं। शारीरिक सक्रियता सीमित होने से भी हड्डियों और जोड़ों की सेहत पर बुरा असर पड़ रहा है। यूनिसेफ ने भी कोरोना महामारी के दौरान बच्चों में गैजेट्स के बढ़ते चलन पर चिंता जताई है।

मानसिक अस्वस्थता
इंडियन साइकियाट्रिक सोसायटी के सर्वे के मुताबिक, कोरोना महामारी ने भारतीयों की मानसिक सेहत को बुरी तरह प्रभावित किया है। हर पांच में से एक भारतीय किसी न किसी मानसिक रोग का शिकार है, इसमें सबसे ज्यादा संख्या उन लोगों की है जो डिप्रेशन में जा रहे हैं। जो लोग पहले से ही इसके शिकार हैं, उनकी समस्या अधिक गंभीर हो गई है। मानसिक तनाव, चिडचिड़ापन और एंग्जाइटी के मामले भी पहले से ज्यादा बढ़े हैं।

आंखों से जुड़ी समस्याएं
घर से काम, ऑन लाइन मीटिंग्स और पढ़ाई के कारण बीते दो वर्षों में बच्चों से लेकर बड़ों का स्क्रीन टाइम बढ़ा है। लगातार स्क्रीन घूरते रहने से ड्राई आईस, कंप्यूटर विजन सिंड्रोम, आंखों से पानी आना, आंखें लाल होना, चश्मों का नंबर बढ़ना जैसी समस्याएं देखी जा रही हैं। आंखों की जांच में देरी करने से समस्या और गंभीर हो रही हैं।

बीमारियों की गंभीरता
संक्रमण के डर से कई लोगों ने अपने स्वास्थ्य और जीवन को खतरे में डाल दिया। नियमित हेल्थ चेकअप नहीं कराए, कोई स्वास्थ्य समस्या होने पर जांच कराने और डॉक्टर से सलाह लेने के बजाय खुद से दवा लेने को प्राथमिकता दी। बहुत से लोगों ने कीमोथेरेपी सही समय पर नहीं करवाई, जिससे कैंसर के लक्षण गंभीर हुए। इसी तरह गठिया के रोगों में भी लापरवाही हुई है।

नवजात शिशुओं के टीकाकरण की अनदेखी
बीते दो सालों में बच्चों का टीकाकरण शेड्यूल बुरी तरह प्रभावित रहा। यूनिसेफ की रिपोर्ट के अनुसार, दुनिया में लगभग दो करोड़ बच्चों का नियमित टीकाकरण नहीं हो पाया है। इस महामारी के पहले भी लाखों बच्चों को सही समय पर टीके नहीं लग पाते थे, पर संक्रमण के डर से हालात बहुत खराब हुए हैं। टीकाकरण के समय में थोड़ा बदलाव कर सकते हैं, पर अधिक देरी करना सही नहीं होता।

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ऐसे में संपूर्ण सेहत का ध्यान रखना होगा, ताकि किसी भी संक्रमण से बच सकें-
-अनुशासित जीवनशैली का पालन करें। समय पर खाएं, पिएं और सोएं।
– घर पर बने ताजा और पौष्टिक भोजन का सेवन करें।
-वजन बढ़ने न दें।
– 6-8 घंटे की पूरी नींद लें।
– नियमित रूप से योग और एक्सरसाइज करें।
-तनाव न पालें। तन के साथ मन को भी सही काम में व्यस्त रखें।
-साफ-सफाई का विशेष ध्यान रखें।
-बिना डॉक्टर की सलाह के कोई दवाई न लें।
-शरीर में कोई भी आसामान्यता दिखे तो तुरंत जांच और उपचार कराएं।

विशेषज्ञ: डॉ. प्रवीण बंसल, निदेशक, मेडिकल आंकोलॉजी, एशियन हॉस्पिटल, फरीदाबाद। डॉ. विवेक लोगानी, जॉइंट रिप्लेसमेंट एंड स्पोर्ट्स इंजुरी सेंटर, पारस हॉस्पिटल, गुरूग्राम। डॉ. सुंदरी श्रीकांत, निदेशक, इंटरनल मेडिसिन, क्यूआरजी सुपर स्पेशिएलिटी हॉस्पिटल, फरीदाबाद

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