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Depression rate higher than pre covid-19: कोरोना का कहर कब तक नासूर बनकर परेशान करता रहेगा, यह कोई नहीं जानता, लेकिन यह लंबे समय तक जीवन में उथल-पुथल मचाएगा, यह तय है. इस बीमारी ने न सिर्फ शारीरिक परेशानी को बढ़ाया है बल्कि मानसिक स्वास्थ्य को सबसे ज्यादा प्रभावित किया है. डेलीमेल की खबर के मुताबिक ब्रिटेन में कोरोना के कारण डिप्रेशन या अवसाद की दर 70 प्रतिशत तक बढ़ गई है. यह सिर्फ ब्रिटेन का हाल नहीं है. लगभग सभी देशों के लोगों का यही हाल है. आंकड़ों के मुताबिक कोरोना के आक्रमण से पहले ब्रिटेन में 10 प्रतिशत लोग डिप्रेशन के शिकार थे. लेकिन कोरोना की पहली और दूसरी लहर के साथ 21 प्रतिशत लोग अवसादग्रस्त हो गए. इस बीच दो लॉकडाउन का दौर भी देखने को मिला जिसके कारण जल्दी ही दोगुने लोग डिप्रेशन में चले गए.

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स्थिति में सुधार हो रही है

हालांकि दो साल बाद अब इस मामले में गिरावट देखी जा रही है. आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक 13 हजार लोगों से उनके मेंटल हेल्थ के बारे एक सर्वे किया गया जिसमें यह बात खुलकर सामने आई कि अब लोग डिप्रेशन से बाहर आने लगे हैं. सर्वे के अनुसार कोरोना काल से पहले की तुलना में डिप्रेशन की दर 70 प्रतिशत से ज्यादा पर पहुंच गई थी, लेकिन अब इसमें सुधार हो रहा है. फिलहाल 10 में से 2 लोग अब भी डिप्रेशन के शिकार हैं. इनमें अधिकांश महिलाएं एवं युवा शामिल हैं. सर्वे में कोरोना की दूसरी लहर के समय जो 21 प्रतिशत लोग डिप्रेस्ड थे, वहीं अब सिर्फ 17 प्रतिशत लोगों को ही अवसाद से जूझना पड़ रहा है.

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महिलाओं में ज्यादा अवसाद

एक अन्य अध्ययन में पाया गया कि लॉकडाउन, सामाजिक अलगाव, नौकरी में कटौती, महामारी को लेकर आशंका आदि कई कारणों की वजह से लोग अवसाद में जा रहे हैं. इस गर्मी में कोरोना के मामले कम होने के बाद सरकार ने कई चीजों से पाबंदी हटा ली जिसके बाद लोग इधर-उधर जा पा रहे हैं और इसी कारण मानसिक स्वास्थ्य में सुधार होने लगा है. 21 जुलाई से 15 अगस्त के बीच जब सर्वे किया गया, तो 6 में से दो लोगों ने बताया कि वे किसी न किसी रूप में अवसादग्रस्त हुए है. महिलाओं में अवसाद का स्तर पुरुषों के मुकाबले ज्यदा था. 16 साल से 29 साल के बीच तीन में से एक महिला  अवसाद से जूझ रही थी. जबकि इस उम्र में सिर्फ 20 प्रतिशत पुरुषों को अवसाद से झेलना पड़ा.

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