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नई दिल्‍ली. विश्‍व भर में ताबही मचा चुकी कोरोना महामारी (Corona Pandemic) से अभी भले ही राहत लग रही है लेकिन कोरोना के मामलों और इससे होने वाली मौतों में कमी के बावजूद इससे जूझ चुके मरीजों में आ रहे पोस्‍ट कोविड इफैक्‍ट (Post Covid Effect) आज बड़ी चिंता बन गए हैं. कोरोना के बाद के असर के रूप में आज मरीजों में नई-नई बीमारियां सामने आ रही हैं. इतना ही नहीं आमतौर पर होने वाली बीमारियां के मरीजों की संख्‍या भी कई गुना हो गई है. किडनी (Kidney), लीवर (Liver), दिल, फेफड़े (Lungs), पैनक्रियाज और आंख के बाद अब कोरोना का असर हड्डियों (Bones) पर भी सामने आ रहा है. वहीं स्‍वास्‍थ्‍य विशेषज्ञों का कहना है कि पोस्‍ट कोविड इफैक्‍ट के रूप में अब से कुछ साल बाद हड्डियों की प्रमुख बीमारी ऑस्टियोपोरोसिस (Osteoporosis) बड़ी संख्‍या में मरीजों को अपना शिकार बना सकती है.

एंडोक्राइन सोसाइटी ऑफ इंडिया के पूर्व अध्‍यक्ष और करनाल स्थित भारती अस्‍पताल के जाने माने एंडोक्राइनोलॉजिस्ट डॉ. संजय कालरा बताते हैं कि अभी तक हड्डियों का घनत्‍व (Bone Mass) कम होने या गैप बढ़ने या हड्डियां खोखली होने की यह बीमारी सबसे ज्‍यादा महिलाओं में सामने आ रही थी लेकिन अब कोरोना के बाद यह पुरुषों के प्रमुखता से अपनी गिरफ्त में ले सकती है. वे कहते हैं कि यह चुपचाप बढ़ने वाली बीमारी है जो धीरे-धीरे शरीर को अपनी जकड़ में लेती जाती है और लोगों को इसका पता भी नहीं चलता. हालांकि इसके परिणाम काफी भयानक हो जाते हैं.

डॉ. कालरा कहते हैं कि भारत में अभी तक इस बीमारी के सालाना एक करोड़ मरीज सामने आ रहे थे. बहुत सारे ऐसे भी मरीज हैं जो इससे जूझ रहे हैं लेकिन इसे नजरअंदाज कर देते हैं. लेकिन अब गंभीर कोरोना बीमारी से जूझ चुके लोग जिन्‍हें बीमारी के इलाज के दौरान स्‍टेरॉयड दिए गए हैं या जो किसी भी अन्‍य वजह से स्‍टेरॉयड ले रहे हैं वे ओस्टियोपोरोसिस के संभावित मरीज हो सकते हैं. अनुमान है कि स्‍टेरॉयड जनित ऑस्टियोपोरोसिस के मरीजों की संख्‍या अगले कुछ सालों में काफी ज्‍यादा हो सकती है.

क्‍या है ऑस्टियोपोरोसिस (What Is Osteoporosis)
ऑस्टियोपोरोसिस एक ऐसी बीमारी है जो हड्डियों को लगतार कमज़ोर करती है. इसमें हड्डियां खोखली हो जाती हैं. इससे शरीर में अप्रत्याशित फ्रैक्चर का खतरा बढ़ जाता है. यह बीमारी बिना किसी दर्द या लक्षणों के बढ़ती है. शायद यही कारण है कि इसे मूक रोग भी कहा जाता है. 30 साल के बाद वैसे भी इंसान के शरीर में हड्डियों का घनत्‍व कम हो जाता है लेकिन ऑस्टियोपोरोसिस होने की दशा में इनके बार-बार टूटने का खतरा बढ़ जाता है. ऐसे में कूल्‍हे, घुटना या रीढ़ की हड्डी का टूटना सबसे खतरनाक माना जाता है.

वे कहते हैं कि बचपन में ऑस्टियोब्‍लास्‍ट (Osteoblast) होता है जिसमें हड्डियां बनती हैं, उसके बाद ऑस्टियोक्‍लास्‍ट (Osteoclast) आता है जिसमें कोशिकाएं टूटती हैं. दोनों साथ-साथ चलती हैं लेकिन अगर ऑस्टियोक्‍लास्‍ट बढ़ जाए तो हड्डी भुरनी या टूटनी शुरू हो जाती है तो मुश्किल होती है. इसके बाद आता है ऑस्टियोपोरोसिस इसमें हड्डियां खोखली हो जाती हैं. जैसे कि एक दीवार में से बीच-बीच में से इंटें निकाल दी जाएं. इसका कोई लक्षण नहीं होता और अचानक बिना चोट लगे भी फ्रैक्‍चर हो जाता है.

ये हैं भारत में ऑस्टियोपोरोसिस बढ़ने के कारण
. भारत में महिलाओं में मीनोपॉज जल्‍दी होना. यहां मीनोपॉज की औसत उम्र 47 है जबकि विदेशों में 51 है. मीनोपॉज के बाद हड्डियां भुरनी शुरू हो जाती हैं.
. भारत में जीवन प्रत्‍याशा उम्र का बढ़ना और करीब 70 साल होना.
. कोरोना के बाद भारत में बड़ी मात्रा में स्‍टेरॉयड्स का इस्‍तेमाल करने से भी हड्डियों के कमजोर होकर टूटने की समस्‍या पैदा हो सकती है.
.पोषण युक्‍त भोजन न मिलने के कारण शरीर में कैल्शियम की कमी, विटामिन डी की कमी आदि का होना.
. शारीरिक व्‍यायाम की कमी भी एक वजह है.

घर पर ऐसे जांचें आपको ऑस्टियोपोरोसिस है या नहीं (Check Osteoporosis at home)
डॉ. कालरा कहते हैं कि ऑस्टियोपोरोसिस की जांच घर पर ही बड़ी आसानी से की जा सकती है. इसके लिए कई उपाय हैं.
.अगर आप अस्‍पताल नहीं जा रहे हैं तो घर बैठे निशुल्‍क (Free) ऑनलाइन तरीके से भी इसकी जांच कर सकते हैं. इसके लिए फ्रैक्‍स (FRAX) टूल यानि फ्रैक्‍चर रिस्‍क असेसमेंट टूल (Fracture risk Assessment Tool) का इस्‍तेमाल कर सकते हैं. यह एक प्रकार का सर्वे है जिसमें आपको अपनी पूरी बेसिक जानकारी देनी होगी और फिर कुछ सवालों का जवाब देना होगा. यह टूल आपको बताएगा कि आपकी हड्डियां कितनी मजबूत हैं या फ्रैक्‍चर रिस्‍क कितना है और क्‍या इलाज की जरूरत है.
. अगर आपको लगता है कि आपकी लंबाई कम हो रही है तो यह ऑस्टियोपोरोसिस की वजह हो सकती है. मीनोपॉज के बाद रीढ़ की हड्डी (Back Bone) की लंबाई कम होना इसी का लक्षण है. या कोई पुरुष तो उसको भी इसकी जांच करानी चाहिए और डॉक्‍टर को दिखाना चाहिए. अपनी लंबाई को समय समय पर नापते रहें.

. घर पर रहकर इस तरीके से भी आप इस बीमारी का पता लगा सकते हैं. सबसे पहले दीवार के सहारे खड़े हो जाएं. फिर अपने शरीर के चार हिस्‍सों एड़ी, नितंब, कंधे और सिर को दीवार से छूएं. अगर किसी व्‍यक्ति का इनमें से एक चीज भी चाहे सिर या एड़ी या कुछ और बिना छुए रह जाती है तो इसका मतलब है कि कुछ गड़बड़ है. इसके लिए ऑस्टियोपोरोसिस भी जिम्‍मेदार हो सकता है.

. इसके अलावा अगर हड्डियों में कुछ कमजोरी जैसा लग रहा है तो बोन डेंसिटी टेस्‍ट डेक्‍सा यानि डुअल एनर्जी एक्‍सरे एब्‍सॉर्ब्टियोमेट्री (DEXA)करा सकते हैं.

इस तरह से कर सकते हैं ऑस्टियोपोरोसिस से बचाव
. गर्भवती महिलाएं प्रेग्‍नेंसी के दौरान कैल्शियम (Calcium) और विटामिन डी (Vitamin D) भरपूर मात्रा में लें. इससे बच्‍चे की हड्डियां मजबूत होंगी. आगे भी बच्‍चे को दूध और पोषणयुक्‍त भोजन दें.
. प्‍यूबटी के आसपास बच्‍चों को 12-14 साल की उम्र में कैल्शियम, आयरन, विटामिन डी से भरपूर पोषणयुक्‍त भोजन दें. इसके साथ ही ज्‍यादा से ज्‍यादा सूरज की रोशनी लेने दें. यही सूरज की रोशनी जीवन भर हड्डियों के लिए काम आएगी.
. जीवनभर अच्‍छा भोजन और अच्‍छा व्‍यायाम करें. मीनोपॉज के बाद कैल्शियम की गोलियां लें और व्‍यायाम जरूर करें.
. हड्डियां जिंदा अंग हैं, इन्‍हें जितना इस्‍तेमाल किया जाएगा ये मजबूत रहेंगी और अगर इन्‍हें पड़ा छोड़ दिया जाएगा यानि व्‍यक्ति कोई काम नहीं करेगा तो हड्डियां और मसल्‍स दोनों कमजोर होती जाएंगी.

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