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seasonal affective disorder symptoms and prevention: बदलता मौसम (Season) अपने साथ कई दुश्वारियां भी लाता है. खासकर सर्दी में. जब सर्दी की आहट होती है तो वातावरण (Environment) में नमी ज्यादा होने लगती है. इस नमी में बैक्टीरिया, फंगस जैसे सूक्ष्मजीवों को पनपने का बेहतर मौका मिल जाता है. ये सब इंसानों में कई बीमारियों (Diseases) को जन्म देते हैं. इसके अलावा सर्दी आने के बाद शरीर में कई तरह के परिवर्तन भी होते हैं. शरीर आवश्यक अंगों को गर्म रखने के लिए ज्यादा एनर्जी की मांग करता है. इसके लिए कई तरह की कमियां और बीमारियां होने लगती है और हम बीमार पड़ने लगते हैं. इन सब बीमारियों के अलावा बदलते मौसम के साथ कुछ लोग मानसिक बीमारी (Mental Diseases) से भी पीड़ित हो जाते हैं. इसे सीजनल अफेक्टिंग डिसऑर्डर (seasonal affective disorder -SAD)कहते हैं.

वेबएमडी की खबर के मुताबिक आमतौर पर एसएडी की बीमारी सर्दी में एक ही समय पर होती है. इस बीमारी के कारण लोगों की भावनाओं में निराशा आने लगती है और वह अवसाद से ग्रस्त होने लगते हैं. एक अनुमान के मुताबिक अमेरिका में एक करोड़ से ज्यादा लोग मौसमी अवसाद यानी एसएडी से पीड़ित हैं जबकि 2.5 करोड़ से ज्यादा लोगों में मौसमी अवसाद के हल्के लक्षण (जिसे विंटर ब्लूज भी कहते हैं) दिखाई देते हैं.

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मौसमी अवसाद के कारण
मौसमी अवसाद का कारण क्या है, इसके बारे में हालांकि सटीक जानकारी नहीं है लेकिन वैज्ञानिकों का मानना है कि मौसम बदलने के साथ ही मूड को प्रभावित करने वाले कुछ हार्मोन में भारी बदलाव आते हैं जिनकी वजह से लोग अवसाद में चले जाते हैं. कुछ मान्यताओं के अनुसार सर्दी में सूरज की रोशनी में कमी के कारण ब्रेन में सेरोटोनिन (serotonin) रसायन कम बनता है जिसके कारण मूड अनियंत्रित होने लगता है.

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लक्षण क्या है

  • मौसमी अवसाद के कारण व्यक्ति की भावनाएं गहरे अवसाद में डूब जाती है.
  • इसके अलावा कुछ व्यक्तियों में वजन भी बढ़ने लगता है.
  • उदासी, निराश और चिड़चिड़ापन बढ़ जाता है.
  • थकान ज्यादा रहती है.अधिक भूख लगती है.
  • किसी चीज पर ध्यान केंद्रित नहीं हो पाता है.
  • अकेले रहने का मन करता है.

मौसमी अवसाद से कैसे डील करें

  • अलग-अलग व्यक्तियों में अवसाद के अलग-अलग लक्षण होते हैं. इसलिए अलग-अलग तरह से इससे डील किया जाता है.
  • कुछ मान्यताओं के अनुसार मौसमी अवसाद का कारण शरीर में प्रकाश की कमी माना गया है. इसलिए डॉक्टर लाइट थेरेपी की सलाह देते हैं.
  • चाहें बादल ही क्यों न निकलें, हर दिन बाहर टहलने के लिए जरूर निकलें.
  • धूप में 10-15 तक बैठे. इसके बाद धीरे-धीरे समय को बढ़ाते हुए 30-35 मिनट तक धूप में बैठें.
  • नियमित रूप से आधे घंटे तक एक्सरसाइज करें.
  • जितना संभव हो सके खुद को कामों में उलझाएं रखें.

Tags: Health, Lifestyle

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