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Mental stress is increasing in Housewives: पूरे घर को संभालने वाली (गृहणी/हाउसवाइफ) हमारी मां या पत्नी  घर के हर एक सदस्य की जरूरत का ख्याल रखती हैं. उनका पूरा दिन घर की चार दीवारी में ही शुरू होता है और उसी में खत्म हो जाता है. सुबह से रात तक उनकी यही कोशिश रहती है कि किसी भी सदस्य को घर में कई तकलीफ न हो. ये सब वो किसके लिए करतीं हैं? अपने परिवार के लिए, परिवार की खुशियों के लिए. फिर जब कभी वो जरा गुस्सा हो जाती हैं, तो हम उन्हें गलत समझने लगते हैं. लेकिन क्या कभी सोचा है कि वो भी कितनी तरह के तनाव से जूझ रही है? उनकी मेंटल हेल्थ के बारे में कभी बात की है? ओनली माई हेल्थ की न्यूज रिपोर्ट के अनुसार, बाहर जा कर काम करने वाली महिलाओं के पास फिर भी बाहर जाकर अपनी बात कहने का या मूड बदलने का एक ऑप्शन होता है, लेकिन हाउसवाइफ के साथ ऐसा नहीं है. ऐसे में वो घर में ही गुस्से में, द्वंद्व में, झुंझलाहट में या चिंता में पड़ी रहती हैं.

इस रिपोर्ट में क्लिनिकल साइकोलॉजिस्ट (Clinical Psychologist) डॉ. प्रज्ञा मलिका (Dr. Pragya Malika) का कहना है कि हाउसवाइफ में तनाव कई वजहों से होता है. ऐसी स्थिति में वे अकेले रहने लग जाती हैं. परिवार में जब कॉन्फ्लिक्ट्स (झगड़े और विवाद) बढ़ते हैं तो वे एडजस्टमेंट की ओर जाते हैं. जब ये मुद्दे हल नहीं हो पाते तो सुसाइड, तलाक या अन्य मेंटल डिसऑर्डर (Mental Disorder) में बदल जाते हैं. इसे ही दुष्चक्र या विशियस साइकल (Vicious Cycle) कहते हैं. डॉ. प्रज्ञा के मुताबिक हाउसवाइफ इन तरीकों को अपनाकर खुश रह सकती हैं.

अपनी हॉबीज को करें याद
डॉ प्रज्ञा का कहना है कि अक्सर महिलाएं घर के काम में उलझकर अपनी हॉबीज (शौक) को भूल जाती हैं. जब ये निराशा या कुंठा बढ़ने लग जाए, तो अपने हुनर को याद करें. वो काम जिसे आप पूरे मजे के साथ करते थे, वो दोबारा करें. खुद सोचें कि आपको क्या करने में अच्छा लगता है. ऐसा करने से आत्मविश्वास बढ़ेगा.

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परेशानी का कारण ढूंढे
डॉ. प्रज्ञा के मुताबिक हाउसवाइफ को ये देखना पड़ेगा कि उन्हें परेशानी किस बात से हो रही है. जब परेशानी की वजह मालूम हो जाए, तब उस पर काम करें. उस परेशानी को मैनेज करें. दरअसल, महिलाओं की टेंशन की एक वजह ये भी है कि महिला और पुरुष का दिमाग थोड़ा अलग तरह से काम करता है. जैसे महिलाएं इमोशनल होकर सोचती हैं और पुरुष लॉजिस्टिक तरीके से सोचते हैं.

नए दोस्त बनाएं
हाउसवाइफ अपने स्ट्रेस को कम करने के लिए नए दोस्त बना सकती हैं. अपने घर के आसपास, रिश्तेदारों में या स्कूल-कॉलेज के दोस्तों के संपर्क में रहें और उनसे बात करते रहना भी कई बार इस स्ट्रेस से निकलने में मदद करता है.

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अपने लिए टाइम निकालें
एक हाउसवाइफ होने के नाते आप क्या चाहती हैं? हाउसवाइफ होने के नाते आपके कुछ सपने होते हैं. तो यहां उन्हें सोचने की जरूरत है कि आप क्या चाहती हैं. खुद को खुश रखने के लिए अपना मी टाइम निकालें.

कुछ चीजों को हालात पर छोड़ दें
डॉ. प्रज्ञा का कहना है कि जिस सिचुएशन में आप कुछ कर नहीं सकतीं. जो हालात आपके बस से बाहर हैं, तो उन पर न सोचें. उन परिस्थितियों को उनके हाल पर ही छोड़ दें.

हमेशा अपनी बेहतरी के बारे में सोचें
हाउसवाइफ जब अपनी बेहतरी के बारे में सोचेंगी तो उन्हें स्ट्रेस कम होगा. वे सोचें कि वे घर को कैसे सुंदर बना सकती हैं या उनकी कोई हॉबी है तो उस पर आगे क्या किया जा सकता है, ये सोचें.

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