[ad_1]

Molecule that Inhibits Covid Infection : पिछले दो सालों से पूरी दुनिया को प्रभावित करने वाला कोरोना वायरस रूप बदल-बदलकर वापस आ रहा है. अब साइंटिस्टों ने एक ऐसा मॉलिक्यूल (Molecule) विकसित किया है, जो सार्स सीओवी-2 (SARS CoV-2) वायरस की सतह से जुड़कर उसे ह्यूमन सेल्स में एंटर करने से रोकता है और कोविड को फैलने नहीं होने देता. डेनमार्क (Denmark) की आरहूस यूनिवर्सिटी (Aarhus University) के डिपार्टमेंट ऑफ मॉलीक्यूलर बायोलॉजी एंड जेनेटिक्स (Department of Molecular Biology and Genetics) के रिसर्चर्स ने अपनी इस स्टडी में पाया कि मॉलिक्यूल (अणु) का निर्माण उस एंटीबाडी से आसान व किफायती है, जिसका इस्तेमाल फिलहाल रैपिड एंटीजन टेस्ट (Rapid Antigen Test) और कोविड के इलाज में किया जा रहा है. आरहूस यूनिवर्सिटी (Aarhus University) में प्रोफेसर और इस स्टडी के मेन राइटर जॉर्गन जेम्स (Jorgen Kjems) के अनुसार, ‘रैपिड टेस्ट में हमने नए एप्टैमर का परीक्षण शुरू किया है. उम्मीद है कि हम वायरस की बहुत कम सांद्रता का भी पता लगा सकेंगे.’

इस स्टडी के निष्कर्षों को पीएनएएस (PNAS) नामक मेडिकल जर्नल में प्रकाशित  में 14 दिसंबर 2021 को किया गया है.

स्टडी में क्या निकला
स्टडी में इस मॉलिक्यूल (अणु) के बारे में विस्तार से जानकारी दी गई है. यह यौगिकों (Compounds) की एक श्रेणी से संबंधित है, जिसे आरएनए एप्टैमर्स (RNA aptamer) कहा जाता और उसी प्रकार के बिल्डिंग ब्लाक्स पर आधारित है, जिनका इस्तेमाल एमआरएनए वैक्सीन (mRNA vaccine) के निर्माण के लिए किया गया है.

यह भी पढ़ें-
अस्थमा के मरीजों में क्यों कम होता ब्रेन ट्यूमर का रिस्क, US साइंटिस्टों ने स्टडी में बताई वजह

एप्टैमर (aptamer), आनुवंशिक सामग्री डीएनए (genetic material DNA) या आरएनए का टुकड़ा (RNA fragment) और तीन आयामों (3 dimensions) में मुड़ी हुई एक संरचना (twisted structure) होती है. वह विशेष लक्षित मॉलिक्यूल की पहचान करता है. आरएनए एप्टैमर (RNA aptamer) वायरस की सतह से जुड़कर उसके स्पाइक प्रोटीन (spike protein) को ह्यूमन सेल्स में प्रवेश करने से रोक देता है.

ओमिक्रॉन का पता लगाने की नई तकनीक विकसित
इससे पहले कोरिया (Korea) के रिसर्चर्स ने ओमिक्रॉन वेरिएंट (Omicron Variant) की पहचान के लिए मॉलिक्यूलर डायग्नोस्टिक टेक्नॉलॉजी (Molecular Diagnostic Technology) विकसित की है. इसके दावा किया जा रहा है कि 20 मिनट में ही पता चल जाएगा कि व्यक्ति वायरस के ओमिक्रॉन वेरिएंट से संक्रमित है या नहीं.

यह भी पढ़ें-
कोरोना से ज्यादा परेशान रहे लोगों के दिमाग में कंफ्यूजन का जोखिम-स्टडी

यह शोध हाल ही में पूरा हुआ है हालांकि अभी इसको दुनिया भर में पहुंचने में वक्त लग सकता है. POSTECH ने 10 तारीख को ऐलान किया कि केमिकल इंजीनियरिंग विभाग के प्रोफेसर ली जंग-वूक के नेतृत्व में एक रिसर्ट टीम ने मॉलिक्यूलर डायग्नोस्टिक टेक्नॉलॉजी विकसित की है जो केवल 20-30 मिनट में ओमिक्रॉन वेरिएंट का पता लगा सकती है और इसका परिणाम ऑनलाइन जारी होगा.

Tags: Coronavirus, Health, Health News



[ad_2]

Source link

Leave a Reply

Your email address will not be published.