[ad_1]

(डॉ. रामेश्वर दयाल)

Famous Food Joints In Delhi-NCR: अगर हम आपसे पूछेंगे कि कौन सी डिश या व्यंजन ने बदलते समय के साथ अपने को लगातार बदला है, तो हो सकता है कि आपको खासा दिमाग खर्च करना पड़े. लेकिन हम इस बाबत खोजबीन कर चुके हैं. हमने पाया है कि वक्त की नजाकत और बदलाव को सबसे पहले समोसे ने ही समझा है. पहले समोसे में मसालेदार उबले आलू भरे जाते थे. फिर आलू-मटर का गठजोड़ बना. उसके बाद दाल समोसे ने अपना झंडा बुलंद किया. लेकिन जैसे ही ‘बाहरी-व्यंजनों’ ने भारतीय खानपान में घुसपैठ शुरू की.

समोसे को तुरंत समझ आ गया कि वक्त बदल रहा है, सो उसने भी अपने रंग बदल लिए. आज पिज़्ज़ा समोसे से लेकर मैकरोनी, वेज कीमा तक के समोसे आ गए हैं. असल में ये नाम के समोसे हैं, लेकिन स्वाद में बिल्कुल बदल चुके हैं. लोग भी इनको हाथों-हाथ ले रहे हैं. आज हम आपको एक ऐसी दुकान पर लिए चलते हैँ, जहां इसी तरह के ‘कॉन्टिनेंटल’ समोसे बेचे जा रहे हैं.

पारंपरिक समोसे भी है तो ‘घुसपैठिए’ समोसे भी हाजिर हैं
असल में समोसे बेचने वालों को ही यह समझ में आ चुका था कि बदलाव जरूरी है, वरना सालों पुराना उनका यह डिश पिछ़ड़ जाएगा. उन्होंने बाहरी व्यंजनों के स्वाद को पकड़कर अपने समोसों में उंडेल दिया. लोगों को यह समोसे भी रास आ गए. रास इसलिए भी आ गए कि समोसा तो कायम ही रहा न, जो उनके दिल में बसा था. चटोरी जुबान को स्वाद में लगातार बदलाव चाहिए, वह मिल ही रहा है.

इसे भी पढ़ेंः अन्ना के हाथ का डोसा-इडली-सांभर है खाना, तो रोहिणी सेक्टर-7 के मद्रास कैफे में पहुंचें

दक्षिण-पश्चिम दिल्ली के पालम इलाके में आप पहुंचेंगे तो पुरानी कॉलोनी राजनगर-2 के पास ‘रामजी वैरायटी समोसा’ की दुकान है. पास में ही पालम रेलवे स्टेशन है, इसलिए पहुंचना आसान है. यहां करीब 15 वैरायटी के समोसे मिलते हैं, जिनमें पारंपरिक आलू, दाल के समोसे तो मिलेंगे ही ‘घुसपैठिए’ समोसे भी आसानी से वहां मिल जाएंगे.

‘विदेशी’ समोसों में विदेशी स्वाद ही घुसेड़ा जाता है, तभी नाम कमाते हैं
समोसों की जो नई वैरायटी है, उनमें शाही पनीर तो है ही, साथ में पिज़्ज़ा, पास्ता, मैकरोनी, वेज कीमा, चाउमीन समोसा भी हाजिर है. इन समोसों को तैयार करने की स्टाइल एकदम से अलग है. जिस डिश या स्वाद का समोसा चाहिए, उसे समोसे में स्टफ्ड बनाकर घुसेड़ दो. जैसे कि पिज़्ज़ा समोसा तैयार करना है तो पिज़्ज़ा बेस, मिक्स वेज और उसके मसाले को अच्छी तरह भून लो, याद रहे कि इसमें भारतीय मसाले न के बराबर डाले जाएंगे, वरना स्वाद बदल जाएगा.

उसके बाद इस समोसे को ऑयल में तल दो. गरमा-गरम समोसे को हरी तीखी चटनी और मीठी लाल चटनी के साथ सर्व कर दो. ग्राहक के मुंह में एक तरफ देसी स्वाद घुल रहा है तो दूसरी तरफ विदेशी डिश का मजा लिया जा रहा है. इन सभी समोसों की कीमत 10 रुपये से लेकर 20 रुपये तक है. दुकान पर खाइए और घर पर भी पैक करके ले जाइए.

इसे भी पढ़ेंः लाहौर के स्वाद से भरे छोले-पूरी खाने का मन है, तो कमला नगर में ‘बिल्ले दी हट्टी’ पर जरूर आएं

दोस्त की मदद से बना लिए ‘कॉन्टिनेंटल’ टाइप समोसे
दिल्ली के इस बाहरी इलाके में इस तरह के समोसों की दुकान खोलने का आइडिया राजेंद्र चौधरी का था. उनके संबंध अयोध्या से भी थे. वहां से उन्होंने समोसे का देसी स्वाद उठाया और अपने एक मित्र से जो विदेशी समोसे बनाने में माहिर था, उससे कारीगरी सीखकर पांच साल पहले यहां दुकान खोल ली. शुरू में लोग पूछते कि अरे, ये समोसे क्या बला हैं, लेकिन खाने पर उन्हें स्वाद भाने लगा. सुबह 7:30 बजे दुकान में कड़ाही पर समोसे तलना शुरू हो जाते हैं और रात 8:30 बजे तक समोसों का मजा लिया जा सकता है. अवकाश कोई नहीं है.

नजदीकी मेट्रो स्टेशन: पालम

Tags: Food, Lifestyle



[ad_2]

Source link

Leave a Reply

Your email address will not be published.