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दुनियाभर में तेजी से पांव पसार रहे कोरोना के नए वेरिएंट ओमीक्रोन की रफ्तार पर रोक लगाने के लिहाज से वैज्ञानिकों ने बड़ी सफलता हासिल की है। दक्षिण कोरिया के वैज्ञानिकों ने एक ऐसी तकनीक विकसित की है जिससे ओमीक्रोन संक्रमण की जांच महज 20 से 30 मिनट में हो जाएगी। अभी यह वेरिएंट पीसीआर जांच से पकड़ में नहीं आता और इसकी पहचान के लिए जीनोम सिक्वेंसिंग की सहारा लिया जाता है, जिसमें कई घंटों का समय लगता है।   

कोरियाई शोधकर्ताओं ने नई तरह की मॉलिक्युलर डायग्नोस्टिक टेक्नोलॉजी विकसित की है। प्रोफेसर ली जंग-वूक की अगुवाई वाली शोध टीम ने इस टेक्नोलॉजी को विकसित किया है। अभी इसका व्यावसायिक इस्तेमाल नहीं किया जा रहा है, लेकिन अगले साल तक इसके इस्तेमाल को मंजूरी मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।  खास बात यह है कि इस तकनीक से जांच के परिणाम ऑनलाइन मिल जाएंगे।

ओमीक्रोन वेरिएंट के स्पाइक प्रोटीन में 26 से लेकर 32 म्यूटेशन होते हैं, लेकिन इसे पीसीआर टेस्ट से पकड़ पाना कठिन होता है। यही वजह है कि डेल्टा वेरिएंट की पहचान पीसीआर टेस्ट से हो जाती है, लेकिन ओमीक्रोन का पता नहीं चल पाता।

इसकी मुख्य वजह यह है कि पीसीआर जांच की मौजूदा तकनीक वायरस के केवल विशेष हिस्से पर फोकस करती है। प्रोफेसर ली के मुताबिक पीसीआर जांच में ओमीक्रोन एन जीन के प्रति मजबूत संकेत देता है, लेकिन एस जीन के प्रति कमजोर संकेत देता है। ऐसे में पीसीआर जांच मरीज के एन और एस जीन, दोनों में संक्रमण का संकेत देती है। इससे ओमीक्रोन संक्रमण की पहचान करना मुश्किल हो जाता है।    

मौजूदा तीन तरीकों से अलग
कोरिया सेंटर्स फॉर डीजीज कंट्रोल एंड प्रिवेंशन की ओर से अब तक कोरोना संक्रमण की जांच के लिए तीन तरीके अपनाए जाते रहे हैं। इनमें जीनोम सिक्वेंसिंग, टारगेट डीएनए एनालिसिस और पीसीआर जांच शामिल है।

जीनोम सिक्वेंसिंग से भिन्न : 
जीनोम सिक्वेंसिंग के तहत डीएनए या आरएनए को पढ़ा जाता है, लेकिन नई तकनीक में ऐसा नहीं किया जाता। मॉलिक्युलर डायग्नोस्टिक टेक्नोलॉजी की खासियत यह है कि इसमें न्युक्लिक एसिड आधारित प्रतिक्रिया तभी देखने को मिलती है जब कोविड-19 का आरएनए मौजूद रहता है। इससे जांच करने में कम समय लगता है। 

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नई तकनीक ज्यादा प्रभावी होगी : 
पीसीआर टेस्ट से हम एक बार में 96 नमूनों में संक्रमण की जांच कर सकते हैं, लेकिन नई तकनीक से 125 से अधिक नमूनों की जांच 30 मिनट में की जा सकेगी। यानी प्रति घंटे 250 नमूनों की जांच हो सकेगी। इस जांच के लिए खास तरह के जटिल उपकरणों की जरूरत नहीं पड़ती जिससे जांच करने में आसानी होती है। नई तकनीक की मदद से महज चार घंटे जांच किट तैयार की सकती है। इससे भविष्य में कोरोना के अन्य नए वेरिएंट के खिलाफ जांच करने में आसानी होगी। 

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