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loneliness during pandemic: पिछले करीब दो साल से कोरोना के कहर ने लोगों का जीना मुहाल कर रखा है. लोगों का जीवन थम सा गया है. शुरुआत में जब लॉकडाउन लगा था, तो दुनिया भर के लोग अपने-अपने घरों में कैद हो गए थे. कुछ लोग तो ऐसे थे, जो लॉकडाउन में अकेले ही कहीं फंस गए. उन्हें महीनों तक वहीं रहना पड़ा. अकेला रहने के कारण लोगों में डिप्रेशन, चिंता, तनाव और खींझ की शिकायतें बढ़ गईं. लेकिन अब एक नई रिसर्च में दावा किया गया है कि महामारी के दौरान अकेला रहने के कारण कई लोगों में सकारात्मक बदलाव भी आया है. एचटी की खबर के मुताबिक महामारी के दौरान सभी उम्र के लोगों में अकेलेपन का सकारात्मक प्रभाव भी पड़ा है. यह अध्ययन फ्रंटियर साइकोलॉजी ( Frontiers in Psychology) में प्रकाशित हुआ है.

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अकेलेपन के कारण स्किल बढ़ाने में फायदा मिला
लगभग दो हजार लोगों पर किए गए अध्ययन में पाया गया कि कोविड-19 के शुरुआती दिनों में अकेले रहने वाले किशोर और वयस्कों ने सकारात्मक लाभ महसूस किया. हालांकि इसमें कोई शक नहीं कि अकेलेपन के कारण सभी लोगों ने नकारात्मक प्रभाव महसूस किया लेकिन इसके साथ ही उन्होंने सकारात्मक लाभ भी महसूस किया. अध्ययन में शामिल लोगों ने लॉकडाउन के दौरान बिगड़ते मूड और अच्छाई के बारे में बात की लेकिन अधिकांश लोगों ने कहा कि उन्होंने लॉकडाउन के दौरान अपनी स्वायत्ता और अपनी क्षमता को पहले से बेहतर महसूस किया. अध्ययन में शामिल 43 प्रतिशत लोगों ने कहा कि लॉकडाउन के दौरान अकेलेपन को उन्होंने अपनी क्षमताओं का इस्तेमाल दक्षता (Skill development) हासिल करने में किया.

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टीनएजर्स ज्यादा अलगाव महसूस किया
अध्ययन में शामिल लोगों ने कहा कि लॉकडाउन में अकेलेपन के दौरान उन्हें खुद से पहले के मुकाबले में ज्यादा जुड़ाव महसूस हुआ और पहले से ज्यादा स्वायत्ता को महसूस किया. इसके अलावा पहले से कहीं ज्यादा खुद पर भरोसा भी कायम हुआ. हालांकि किशोरों की तुलना में कामकाजी वयस्कों को लॉकडाउन के दौरान नकारात्मक चीजों का अनुभव ज्यादा करना पड़ा. जहां 35.6 प्रतिशत कामकाजी वयस्कों को नकारात्मक अनुभवों से गुजरना पड़ा वहीं सिर्फ 23.7 प्रतिशत टीनएजर्स को ही नकारात्मक अनुभवों का सामना पड़ा. किशोरों के मुकाबले लॉकडाउन में वयस्कों का मूड भी ज्यादा खराब हुआ. हालांकि किशोरों ने दोस्तों के साथ जुड़ाव की कीमत पर अलगाव का अनुभव वयस्कों से ज्यादा किया. अध्ययन के मुताबिक अपने दोस्तों से अलग होने के कारण 14.8 प्रतिशत किशोरों ने अलगाव का अनुभव किया, वहीं सिर्फ 7 प्रतिशत वयस्कों को ही ऐसा महसूस हुआ.

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