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Workplace pressure increase the risk of stroke : आजकल के लाइफस्टाइल में हर इंसान किसी ना किसी तरह के प्रेशर से जूझ रहा है. किसी को घर की जिम्मेदारियों का प्रेशर है, किसी को ऑफिस या बिजनेस में परफोर्मेंस का. ये दबाव या प्रेशर कैसा भी हो, इससे नुकसान आखिरकार सेहत का ही होता है. ज्यादा प्रेशर के लोड में इंसान तनावग्रस्त भी हो सकता है. स्वीडन की यूनिवर्सिटी ऑफ गोथनबर्ग (University of Gothenburg) की स्टडी में दावा किया गया है कि वर्क प्लेस प्रेशर (Work Place Pressure) और पैसे की चिंता (Money Worries) सेहत पर भारी पड़ती है. इससे स्ट्रोक (Stroke) और हार्ट अटैक (Heart Attack) के खतरे की आशंका लगभग 30 फीसदी तक बढ़ जाती है. डेली मेल में छपी न्यूज रिपोर्ट के अनुसार, इस स्टडी में कई देशों के एक लाख लाेगों को शामिल किया गया. इसमें सामने आया कि लंबे समय तक मानसिक तनाव (Mental Stress) के कारण शरीर में कोर्टिसोल (Cortisol) की मात्रा बढ़ जाती है. जिसकी वजह से  ब्लड कोलेस्ट्रॉल (Blood Cholesterol), ब्लड शुगर (Blood Sugar) और ब्लड प्रेशर (Blood Sugar) बढ़ जाता है.

इस स्टडी में 30 से 70 साल आयु वर्ग के लोगों को शामिल किया गया था. इसमें सामने आया कि उम्र बढ़ने के साथ-साथ लोगों में मानसिक तनाव (mental stress) भी बढ़ता है.

क्या कहते हैं जानकार
इस स्टडी को लीड करने वाली डॉ एनिका रोसेगेन (Annika Rosengren) ने बताया कि वर्क प्लेस का प्रेशर और पैसों की चिंता से कार्डियोवैस्कुलर बीमारियां (Cardiovascular diseases) और ब्लड क्लॉटिंग (Blood clotting) की आशंका भी बढ़ जाती हैं.

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डॉ एनिका रोसेगेन (Annika Rosengren) का कहना है, ‘यह ठीक से ज्ञात नहीं है कि गंभीर रूप से तनावग्रस्त लोगों में हार्ट डिजीज के खतरे का क्या कारण होता है,’लेकिन शरीर में कई अलग-अलग प्रक्रियाएं, जैसे एथेरोस्क्लेरोसिस (atherosclerosis) और रक्त के थक्के (blood clotting), तनाव से प्रभावित हो सकते हैं. यदि हम ग्लोबल लेवल पर हार्ट डिजीज के रिस्क को कम करना चाहते हैं, तो हमें तनाव को एक अन्य परिवर्तनीय जोखिम कारक (modifiable risk factor) के रूप में विचार करने की जरूरत है.’

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हेल्दी लाइफस्टाइल अपनाना जरूरी
स्टडी के अनुसार हार्ट की बीमारियों (Heart Disease) से दुनिया भर में हर साल लगभग 18 करोड़ लोगों की मौत होती है. दुनिया में होने वाली मौतों का सबसे बड़ा कारण हार्ट संबंधी रोग (heart disease) हाेते हैं. इससे बचने का उपाय है पॉजिटिव सोच (Positive thinking) और स्वस्थ जीवन शैली (healthy lifestyle). 40 साल की उम्र के बाद हर व्यक्ति को चाहिए वो एक्सरसाइज को अपनी दिनचर्या में शामिल करे.

Tags: Health, Health News, Lifestyle, Mental health



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