[ad_1]

गठिया और जोड़ों की परेशानियों से जूझ रहे लोगों के लिए ठंड का समय मुश्किल भरा होता है। पुरानी चोट और जोड़ के दर्द भी इस समय सिर उठाने लगते हैं। इससे पहले कि जोड़ ज्यादा दुखने लगें, जीवनचर्या में कौन से सुधार करने जरूरी हैं, बता रहे हैं विवेक शुक्ला-

आमतौर पर जोड़ों में दर्द का प्रमुख कारण आर्थ्राइटिस (गठिया) होता है। ठंड के कारण जोड़ों की धमनियां (आर्टिरीज) सिकुड़ जाती हैं। धमनियों के सिकुड़ने से जोड़ों में रक्त का तापमान कम हो जाता है और रक्त संचार की प्रक्रिया समुचित रूप से संचालित नहीं होती। इसके परिणामस्वरूप जोड़ों में अकड़न होने लगती है और दर्द होने लगता है। ठंडे तापमान में मांसपेशियों में ऐंठन भी बढ़ जाती है। जोड़ों तक रक्त संचार समुचित न होने के कारण दर्द की समस्याएं और बढ़ जाती हैं।

इन लोगों को ज्यादा है जोखिम
जिन्हें पहले से गठिया है, ठंड में उनकी समस्याएं कहीं ज्यादा बढ़ जाती हैं। वैसे गठिया के कई प्रकार हैं, लेकिन जो लोग ऑस्टियो आर्थ्राइटिस, रूमेटॉएड आर्थ्राइटिस, गाउटी आर्थ्राइटिस, ट्रॅामेटिक आर्थ्राइटिस और स्पाइनल आर्थ्राइटिस से पीड़ित हैं, उन्हें ठंड की शुरुआत से ही दर्द और सूजन परेशान करने लगते हैं। जुवेनाइल आर्थ्राइटिस से पीड़ित बच्चों में भी दर्द बढ़ जाता है। इसके अलावा, पहले कभी दुर्घटना में हड्डियां और लिगामेंट आदि क्षतिग्रस्त हुए हैं, तो उस स्थिति में भी इस मौसम में प्रभावित हिस्से में दर्द बढ़ जाता है। पहले जोड़ों की समस्याएं पचास के बाद ही देखने को मिलती थीं, पर अब दर्द व सूजन की समस्याएं कम उम्र के लोगों को भी अपना निशाना बना रही हैं। अस्वस्थ जीवनशैली और खानपान की गड़बड़ियां इसके मुख्य कारण हैं।

ऑस्टियो आर्थ्राइटिस होने पर
देश में सबसे ज्यादा लोग ऑस्टियो आर्थ्राइटिस (ओए) से ही ग्रस्त हैं। जोड़ों के मध्य स्थित कार्टिलेज (जो जोड़ों के मध्य कुशन का काम करती है) बढ़ती उम्र, खासकर 50 वर्ष के बाद गलत जीवनशैली के कारण घिसने लगती हैं। इस कारण जोड़ आपस में रगड़ खाते हैं और कालांतर में धीरे-धीरे क्षीण होते रहते हैं। एक ऐसी स्थिति आती है, जब व्यक्ति को चलने-फिरने और सीढ़ियां चढ़ने-उतरने में दिक्कत महसूस होने लगती है। ओए का असर मुख्य रूप से घुटनों के जोड़ोंपर पड़ता है।

रोकथाम
ओए से पीड़ित लोगों को ठंड की शुरुआत में ही अपने हड्डी रोग विशेषज्ञ से मिल लेना चाहिए। दवाएं, फिजियोथेरेपी व व्यायाम के अलावा, पोषक तत्वों से भरपूर आहार लेना चाहिए। खासकर कैल्शियम की पर्याप्त मात्रा लेनी चाहिए। नी कैप पहनें। असहनीय दर्द हो रहा हो, तो विशेषज्ञ दर्द निवारक दवाएं व इंजेक्शन की सलाह दे सकते हैं।

रूमेटॉएड आर्थ्राइटिस वाले रहें सजग
यह एक विशेष तरह का गठिया है, जिसके कारणों पर मेडिकल शोध अभी तक जारी हैं। रूमेटॉएड आर्थ्राइटिस (आरए) का उम्र बढ़ने या कार्टिलेज के क्षीण होने या खानपान से खास लेना-देना नहीं है। आरए में शरीर का रोग प्रतिरोधक तंत्र अपने ही शरीर के खिलाफ लड़ाई छेड़ देता है। पहला हमला जोड़ की झिल्लियों पर होता है।

रोकथाम
समय रहते आरए का उपचार न कराने पर व्यक्ति के लिए रोज के सामान्य कामों को करना भी कठिन हो जाता है। प्रभावित हड्डी व जोड़ क्षीण होने लगते हैं और तेज दर्द होता है। फिजियोथेरेपी, योग और व्यायाम से भी कुछ राहत मिलती है। यह गठिया पूरी तरह ठीक नहीं होता, पर सही प्रबंधन से इसे बढ़ने से रोक सकते हैं। डॉक्टर दर्द निवारक दवाएं देते हैं। इम्यून सिस्टम में आई गड़बड़ी को दूर करने के लिए इम्यूनोमॉड्यूलेटर्स दिए जाते हैं। कई लोगों में ठंड की शुरुआत में ही प्रभावित जोड़ों पर सूजन आने लगती है। ऐसे में पहले ही डॉक्टर से संपर्क करते रहें। खानपान से जुड़े परहेजों का पालन करें।

खुद से स्टेरॉएड्स न लें
जोड़ों का दर्द कम करने के लिए डॉक्टर कभी-कभी इंट्रा आर्टिकुलर कॉर्टिकोस्टेरॉएड के इंजेक्शन की सलाह दे देते हैं। इनके फायदे व नुकसान दोनों हैं। तेज दर्द व जोड़ टेढ़े होने पर डॉक्टर इंजेक्शन व स्टेरॉएड्स दवाएं दे सकते हैं, पर यह योग्य चिकित्सक की देखरेख में ही लें। एक बार आराम होने के बाद अगली बार दर्द होने पर खुद से दवाएं न लें। अपना इलाज खुद से कभी भी न करें।

ठंड में खास ध्यान दें
हाइड्रेटेड रहें: पर्याप्त मात्रा में पानी पिएं। कम पानी जोड़ों के दर्द की समस्या को और बढ़ा देता है। रक्त संचार पर भी इसका असर पड़ता है। ठंड के बावजूद पानी व तरल पदार्थों के सेवन पर ध्यान दें।

विशेषज्ञ से परामर्श : जोड़ों में अकड़न और मांसपेशियों में कमजोरी जैसे लक्षणों में सुधार के लिए अस्थि रोग विशेषज्ञ से परामर्श लें। रूमेटॉएड आर्थ्राइटिस होने पर किसी अच्छे रूमेटोलॉजिस्ट के पास जाकर ही उपचार कराएं।

ओमेगा -3 फैटी एसिड : यह एसिड जोड़ों में सूजन के स्तर को कम करने में फायदेमंद होता है। एवोकाडो, अलसी, अखरोट और मछली खाएं। ठंड में सूखे मेवे भी ज्यादा मात्रा में खाए जा सकते हैं।

सुबह की धूप : विटमिन डी का एक अच्छा प्राकृतिक स्रोत है धूप। धूप में बैठने से जोड़ों के दर्द और सूजन में राहत मिलती है। कमर दर्द में भी लाभ मिलता है।

घरेलू उपाय भी देंगे आराम
● प्रभावित जोड़ों पर गर्म और ठंडे पानी की पट्टियों की सेंक से जोड़ों के दर्द में राहत मिलती है। सूजन ज्यादा होने पर कपड़े में बर्फ लपेटकर उसकी सेंक देना भी फायदेमंद रहता है।
● अदरक में दर्द व सूजन कम करने वाले तत्व होते हैं। अदरक के तेल का भी इस्तेमाल कर सकते हैं।
● तिल के तेल की नियमित मालिश करें।
● हल्दी में मौजूद करक्यूमिन तत्व जोड़ों की सूजन कम करता है। एक चम्मच हल्दी को आधा चम्मच पिसी हुई अदरक के साथ मिलाएं। इस मिश्रण को एक कप पानी में डालकर 10 से 15 मिनट तक उबालें। इसे प्रभावित जोड़ों पर दिन में दो से तीन बार लगाएं। इसी तरह हल्दी, मेथी और सोंठ इन तीनों को समान मात्रा (20- 20-20 ग्राम) में मिश्रित कर उनका पाउडर बना लें। इस मिश्रण को एक-एक चम्मच दिन में दो बार भोजन के बाद गर्म पानी से लें। इससे आपको जोड़ों के दर्द में आराम मिलेगा।
● तुलसी रूमेटॉएड आर्थ्राइटिस के लिए फायदेमंद मानी जाती है। इससे जोड़ों के दर्द में भी राहत मिलती है।
● नींबू ,आंवला और पपीता में विटामिन सी पर्याप्त मात्रा में पाया जाता है। विटामिन सी शरीर के रोग प्रतिरोधक तंत्र को मजबूत करता है।
● ब्रोकली खाएं। मैदा और उससे बनी चीजों से परहेज करें। चीनी, मिठाई, अंडा, मांसाहार और ठंडी चीजों से परहेज करें। उड़द दाल, राजमा, छोले, गोभी और तले खाद्य पदार्थ, आदि वातवर्धक चीजें न खाएं।

कोविड और जोड़ों का दर्द
जिन लोगों को कोरोना वायरस का संक्रमण हो चुका है, उनमें ठीक होने के बाद जोड़ों, हड्डियों व कमर दर्द के मामले सामने आए हैं। खासकर वे लोग, जिन्हें फेफड़ों के संक्रमण से गंभीर रूप से प्रभावित होने के बाद जीवन रक्षक उपकरणों पर रखा गया था, उनमें ठीक होने के बाद भी जोड़ों में दर्द की समस्या लगातार बनी हुई पाई गई है। ऐसे में कोविड से उबरे लोगों को इस ठंड में खास रूप से ध्यान देना चाहिए। जोड़ों में परेशानी होने पर डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए।
कोरोना के नए वेरिएंट ओमीक्रॉन के जो मामले विदेशों में सामने आए हैं, उनमें भी जोड़ों में दर्द की समस्या देखने को मिल रही है।

ऐसे रखें घुटनों का ध्यान
ऊंचीहील न पहनें
ऊंची हील के जूते या चप्पल पहनने से कमर सीधी नहीं रहती और इनसे एड़ियों, घुटनों, पिंडलियों और कूल्हों पर जोर पड़ता है। चोटिल होने का खतरा भी ज्यादा होता है। ठंड में छोटी-सी मोच या चोट भी ठीक होने में समय ज्यादा लेती है। सही साइज के फ्लैट जूते ही पहनें।

मोटापे पर रखे नियंत्रण
मोटापे का आकलन बॉडी मास इंडेक्स (बीएमआई) से किया जाता है। इसमें लंबाई और वजन का अनुपात देखा जाता है। पैरों और घुटनों के जोड़ों पर मोटापे का ज्यादा प्रभाव पड़ता है। ऐसा इसलिए, क्योंकि वजन जितना ज्यादा होगा, उसका भार पैरों और घुटनों पर उतना ही बढ़ेगा। इससे जोड़ों के कार्टिलेज घिसने लगते हैं। गठिया की समस्या बढ़ सकती है।

सही पॉस्चर का ध्यान रखें
रीढ़ की हड्डी को सही पॉस्चर में न रखना कालांतर में कमर दर्द की समस्या उत्पन्न कर सकता है और जाड़े के मौसम में यह समस्या कुछ ज्यादा ही बढ़ जाती है। कंधे झुका कर चलना या कमर को एक तरफ झुकाकर काम करना दर्द बढ़ाता है। दर्द से बचने के लिए इन बातों पर अमल करें:
● रीढ़ या गर्दन दर्द की समस्या है तो स्पाइन सर्जन की सलाह का पालन करें। वे लंबर बेल्ट या सर्वाइकल कॉलर पहनने की सलाह दे सकते हैं।
● अस्थि रोग विशेषज्ञ या फिजियो-थेरेपिस्ट के बताए व्यायाम करें। ● लेटकर बात न करें, टीवी न देखें। सीधे बैठकर काम करें।
● सही फिटिंग वाले ऊनी वस्त्र पहनें। जोड़ों को ठंडी हवा से बचाएं। ●
● कंधों को झुकाकर न चलें।
● झटके से वजन न उठाएं।
● वार्म-अप के बाद ही व्यायाम करें। जोड़ों की समस्या रहने पर शारीरिक रूप से सक्रिय रहना बेहद जरूरी है। ठंड में भी पैदल चलने व सैर का रूटीन बनाए रखें।
● ऑफिस में लगभग हर डेढ़ घंटे बाद अपनी सीट से पांच मिनट के लिए उठें। घूमें-फिरें। शरीर को स्ट्रेच करें।

घुटनों के दर्द में मिलेगा आराम
● विशेषज्ञों द्वारा बताए घुटने और पैरों से जुड़े व्यायाम करें।
● सूर्य नमस्कार, हलासन और त्रिकोणासन घुटनों और अन्य जोड़ों की सेहत के लिए लाभप्रद हैं। योग विशेषज्ञ से परामर्श लेकर ही इन्हें करें।
● स्पोर्ट्स शूज पहनने से घुटनों और पैरों के जोड़ों को आराम मिलता है।
● हाई हील जूते व सैंडल पहनने से घुटनों पर अनावश्यक जोर पड़ता है।
● पैरों के नीचे तकिया रखकर सोएं, इससे रक्त संचार सही रहता है।
● विशेष स्टॉकिंस पहनने की सलाह भी आपको दी जा सकती है।

 

 

पंचकर्म चिकित्सा अपनाएं
वैकल्पिक चिकित्सा के तहत आयुर्वेद, प्राकृतिक चिकित्सा और घरेलू या पारम्परिक चिकित्सा को शुमार किया जाता है। पंचकर्म चिकित्सा के अंतर्गत स्नेहन (आयुर्वेदिक तेलों से विशेष प्रकार की मसाज), स्वेदन (भाप लेना और सिकाई करना), पोटली मसाज और जड़ी-बूटियों के लेप लगाए जाते हैं। आयुर्वेदिक चिकित्सक दवाएं भी देते हैं। सर्दियों में सलाह अनुसार पंचकर्म चिकित्सा लेना जोड़ों को सक्रिय रखता है।

हमारे विशेषज्ञ : डॉ. सुदीप जैन, एमसीएच (एम्स), निदेशक, स्पाइन सॉल्यूशंस इंडिया, नारायणा विहार, नई दिल्ली। डॉ. प्रताप चौहान, वरिष्ठ आयुर्वेद विशेषज्ञ,फरीदाबाद। डॉ. स्वरूप पटेल, सीनियर ऑर्थोपेडिक सर्जन,एपेक्स हॉस्पिटल, वाराणसी।

 

यह भी पढ़ें : सर्दियों में गुड़ और सोंठ के कॉन्बिनेशन से बनाएं फायदेमंद और स्वादिष्ट लड्डू

[ad_2]

Source link

Leave a Reply

Your email address will not be published.