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Children Develop More Near Nature : कहते हैं कि बच्चों (Children) को जैसा माहौल देंगे और उनका मानसिक और शारीरिक विकास वैसा ही होता है. लेकिन अब ये सिर्फ कहने भर की बात नहीं है, बल्कि साइंटिस्टों ने अपनी एक रिसर्च के जरिए इसे साबित भी कर दिया है. दैनिक जागरण अखबार में छपी न्यूज रिपोर्ट के अनुसार, अब एक ताजा स्टडी में पता चला है कि जो बच्चे हरे-भरे वातावरण मतलब ग्रीन एनवायरमेंट (Green Environment) में पले-बढ़े होते हैं, उनके ब्रेन का डेवलपमेंट दूसरे बच्चों की तुलना में अधिक होता है, जिससे उनके लाइफ में सफल होने की संभावना भी बढ़ जाती है.  यूसीबी यानी यूनिवर्सिटी ऑफ ब्रिटिश कोलंबिया (University of British Columbia) के रिसर्चर्स द्वारा की गई इस स्टडी को द लैंसेट प्लैटेनरी हेल्थ (The Lancet Planetary Health) में प्रकाशित किया गया है.

इस स्टडी के अनुसार, यूबीसी में फैकल्टी ऑफ फरेस्ट्री मेडिसिन (Faculty of Forestry) ने इस स्टडी के लिए मेट्रो वैंकूवर (Metro Vancouver) के 27 हजार 372 बच्चों के डेवलपमेंट स्कोर की स्टडी की. जिन्होंने 2005 से 2011 के बीच किंडरगार्टन (Kindergarten) में भाग लिया था.

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रिसर्च करने वालों ने अपनी स्टडी के रिजल्ट को पीछे की वजह का भी पता लगाया. रिसर्चर्स के अनुसार, उसकी वजह ये थी कि घर के आसपास का हरा भरा इलाका एयर पॉल्यूशन (Air Pollution) को कम करने के साथ-साथ शोर के हानिकारक प्रभावों को भी कम करने में मददगार साबित होता है. ऐसा होने से तनाव और नींद में कमी के कारण होने वाली प्रॉब्लम से बचाव होने की संभावना बढ़ जाती है. क्योंकि हरे भरे क्षेत्र की वजह से वहां पर ऐसा माहौल हो जाता है कि वहां पर्याप्त नींद ली जा सकती है और पॉल्यूशन भी कम होता है.

रिसर्चर्स का क्या कहना है 
रिसर्च की प्रमुख लेखक इंग्रिड जार्विस (Ingrid Jarvis) के अनुसार, कुछ स्टडी हरे भरे क्षेत्र और बच्चों के विकास के बीच संबंध का पता लगा चुके हैं, लेकिन हमारा मानना है कि ये इस तरह का पहला कनाडाई अध्ययन है. इस अध्ययन के वरिष्ठ लेखक और यूबीसी में शोध सहयोगी मटिल्डा वैन के मुताबिक, अभी इस दिशा में और स्टडी की जरूरत है, लेकिन हमारी स्टडी इस बात की पुष्टि करती है कि हरे भरे माहौल में बच्चे का पालन पोषण होने से उनका मानसिक विकास होता है. इस वजह से जीवन में उनके सफल होने की संभावनाए बढ़ जाती है.

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किस तरह की गई स्टडी
रिसर्चर्स ने बच्चों के जन्म से लेकर उनके 5 साल के होने तक इस बात पर ध्यान रखा कि उनके घर के आसपास हरा-भरा क्षेत्र कितना था, इसी तरह उन्होंने ट्रैफिक के कारण होने वाले वायु प्रदूषण और आसपास के शोर के लेवल का भी विश्लेषण किया. स्टडी के परिणाम में सड़क किनारे के पेड़ों, पार्कों, सामुदायिक उद्यानों (community gardens) जैसे प्राकृतिक स्थानों का महत्व सामने आया.

स्टडी में क्या निकला
स्टडी की प्रमुख लेखक इंग्रिड जार्विस के अनुसार, हमने अपनी स्टडी में बच्चों की भाषा, कौशल, संज्ञात्मकता (पहचानने की) क्षमता, सामाजिकरण और अन्य चीजों में उनके प्रदर्शन का पता लगाया. सभी बच्चों का प्रदर्शन अच्छा रहा, लेकिन जो महत्वपूर्ण बात सामने आई, वो ये थी कि जो बच्चे ऐसे इलाकों में पले-बढ़े, जहां हरियाली ज्यादा थी, उनका विकास दूसरे बच्चों की तुलना में अधिक हुआ.

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