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Know The Concept Of Human Library : आमतौर पर लाइब्रेरी एक किताबों की दुनिया होती है जहां इंसान (Human) चीजों को समझने और ज्ञान बढाने के लिए जाता है. लेकिन एक लाइब्रेरी (Library) ऐसी भी है जहां किस्‍से के किरदार खुद अपनी दास्तां सुनाते हैं, वो भी आपके सामने बैठकर. जी हां, इसे ह्रयूमन लाइब्रेरी ( Human Library) नाम दिया गया है. यहां किरदार आपको अपनी कहानियों में ले जाते हैं और आपके मन में उठ रहे तमाम सवालों के जवाब वे खुद देते चलते हैं. ये दुनिया है उन अनदेखी और अनसुनी परिस्थितियों में जीने वाले लोगों और उनके प्रति जिज्ञासा रखने वाले इंसानों के बीच की. यहां मन में उठ रहे हर तरह के सवाल पूछे जा सकते हैं और उनका सीधा और सधा जवाब सही सोर्स से पाया जा सकता है. ये वे सवाल और जवाब हैं जो आमतौर पर हमारे आसपास देने के लिए कोई नहीं होता. तो आइए जानते हैं इसके बारे में.

क्‍या है ह्रयूमन लाइब्रेरी

दरअसल ह्रयूमन लाइब्रेरी एक अंतरराष्ट्रीय संस्‍था है जिसका उद्देश्य हर तरह के लोगों के बीच सोशल कनेक्‍शन बनाना और उनके बीच के भ्रम को दूर करना है. इसकी मदद से लोगों को किसी भी तरह के पूर्वाग्रह से बाहर आने में मदद मिलती है. दरअसल यह एक ‘इंसानी किताबों’ की  ‘ह्यूमन लाइब्रेरी’ है जिसे संस्‍थान समय समय पर आयोजन करती हैं जिसमें शिरकत कर आप अपनी मनपसंद ‘इंसानी किताब’ ले सकते हैं. यानी कि उसके साथ कुछ वक्त बिता सकते हैं और उन मुद्दों पर बात कर सकते हैं जिनमें वे महारत रखते हैं.

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क्‍या है इसका इतिहास

दुनिया में पहली ह्यूमन लाइब्रेरी साल 2000 में डेनमार्क में शुरू हुई थी. यहां के एक युवा रोनी एबेरगेल ने अपने भाई और दोस्तों के साथ मिलकर इस विचार को मूर्त रूप दिया था जिसका मकसद ‘इंसानी किताबों’ के अनुभव का इस्तेमाल कर एक बेहतर दुनिया बनाना था . धीरे धीरे यह विचार इतना लोकप्रिय हुआ कि दुनिया में कई जगहों पर ह्यूमन लाइब्रेरी बनाई गई. ऑस्ट्रेलिया ऐसा पहला देश है जहां एक स्थायी ह्यूमन लाइब्रेरी है. अब तक 80 देशों में ऐसी लाइब्रेरी चलाई जा रही है जिसे ह्रयूमन राइट्स के क्षेत्र में बेहतरीन काम करने के लिए कई अंतरराष्‍ट्रीय पुरस्‍कार दिए जा चुके हैं.

किस तरह की है ये इंसानी किताबें

संस्‍था का कहना है कि ह्रयूमन लाइब्रेरी में जितनी भी इंसानी किताबें हैं वे वैसे वॉलेंटियर्स हैं जिनसे आमतौर पर हमारी मुलाकात नहीं हो पाती और सोसायटी उन्‍हें अलग नजरिए से देखती है. ये इंसानी किताबें अपने टॉपिक में पर्सनल एक्‍सपेरिएंस्‍ड होते हैं. संस्‍था के मुताबिक ये एक ऐसी जगह होती है जहां कठिन से कठिन सवाल की अपेक्षा की जाती है और सवाल किए जाने पर सराहना की जाती है.

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भारत में भी बढ़ रहा है प्रचलन

हमारे देश में अभी दिल्‍ली, हैदराबाद, इंदौर, चेन्‍नई, मुंबई सहित नौ शहरों में ह्रयूमन लाइब्रेरी चलाई जा रही है.इन ह्यूमन लाइब्रेरी की खासियत ये है कि यहां पाठक ‘इंसानी किताब’ के सामने अपनी पूर्वाग्रहों के साथ बैठता है और  उस मुद्दे पर अपनी समझ को साफ करता जाता है जिसके बारे में उसे अब तक कुछ भी गहराई से पता नहीं था.

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