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कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि को भाई दूज मनाया जाता है. Image : Pixabay

कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि को भाई दूज मनाया जाता है. Image : Pixabay

Bhai Dooj 2021 kab hai : भाई बहन का त्‍योहार भाई दूज (Bhai Dooj) इस साल कब मनाया जाना है (Bhai Dooj 2021 kab hai), इसकी जानकारी अगर आपको अब तक नहीं हो पाई है तो हम यहां आपको बताते हैं इस साल आप कब इसे मना सकते हैं. 6 नवम्बर यानी कि शनिवार के दिन भाई दूज मनाया जायेगा. भाई दूज का पावन त्‍योहार यम द्वितीया (Yam Dwitiya) के नाम से भी जाना जाता है. भाई दूज के दिन हर भाई अपनी बहन के घर जाता है और शुभ मुहुर्त (Shubh Muhurat) देखकर बहन भाई के माथे पर तिलक लगाकर स्‍वागत करती है. इस दिन बहन अपने हाथों से भाइयों लिए खाना बनाती है और खिलाती है. कहा जाता है कि इससे भाई की उम्र लम्बी होती है.

Bhai Dooj 2021 kab hai: दीपावली (Diwali) के दूसरे दिन यानि गोवर्धन पूजा के अगले दिन भाई दूज (Bhai Dooj) मनाई जाती है. यह त्‍योहार भी राखी की तरह भाई बहन के प्रेम का त्योहार है. दीपावली के दो दिन बाद भाईदूज मनाने की परंपरा है. भाई बहन के स्नेह के इस पर्व का महत्व भी रक्षाबंधन से कहीं कम नहीं माना जाता है. भाईदूज के दिन बहन जहां भाई की लंबी उम्र की कामना करती है वहीं भाई अपनी बहन को सुख समृद्धि का आर्शीवाद देता है. जानिए इस साल किस दिन है भाई दूज (Bhai Dooj 2021 kab hai) और क्या है शुभ मुहूर्त (Bhai Dooj 2021 Shubh Muhurat).

भाई दूज शुभ मुहूर्त

इस साल भाई दूज का त्योहार 6 नवम्बर शनिवार के दिन मनाया जायेगा. इस दिन भाईयों को तिलक लगाने का शुभ मुहूर्त दोपहर 1.10 बजे से लेकर 3.21 बजे तक रहेगा. इस बार द्वितिया तिथि 5 नवंबर को रात्रि 11 बजकर 14 मिनट से लगेगी जो 6 नवम्बर को शाम 7 बजकर 44 मिनट तक बनी रहेगी.

भाई दूज मनाये जाने के पीछे की कहानी

पौराणिक कथाओं के अनुसार यम और यमुना भगवान सूर्य और उनकी पत्नी संध्या की संतान हैं. बहन यमुना की शादी के बाद भाई दूज के दिन ही यमराज अपनी बहन के घर गए थे. इस अवसर पर यमुना ने उनका आदर-सत्कार किया और उनके माथे पर तिलक लगाकर यमराज को भोजन कराया था. अपनी बहन के इस व्यवहार से खुश होकर यमराज ने बहन यमुना से वरदान मांगने को कहा. इस पर यमुना जी ने कहा कि मुझे ये वरदान दो कि इस दिन जो भी भाई अपनी बहन के घर जाकर तिलक लगवायेगा और बहन के हाथ का भोजन करेगा उसको अकाल मृत्य का भय नहीं होगा. यमराज ने उनकी ये बात मान ली और खुश होकर बहन को आशीष दिया. माना जाता है तब से ही भाई दूज मनाने की परंपरा चली आ रही है. इस त्योहार से जुड़ी एक और पौराणिक कथा के अनुसार भाई दूज के दिन ही भगवान श्री कृष्ण ने नरकासुर राक्षस का वध किया था और वापस द्वारिका लौट कर आये थे. तब भगवान श्री कृष्ण की बहन सुभद्रा ने उनका स्वागत किया था और माथे पर तिलक लगाकर उनके दीर्घायु होने की कामना की थी.(Disclaimer: इस लेख में दी गई जानकारियां और सूचनाएं सामान्य मान्यताओं पर आधारित हैं. Hindi news18 इनकी पुष्टि नहीं करता है. इन पर अमल करने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से संपर्क करें.)

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