टमाटर एक स्वादिष्ट सब्जी है, जिसका रोगों से रक्षा करने वाले आहार के रूप में हमारे भोजन में महत्त्वपूर्ण स्थान है। मनुष्य को ज्ञात सभी खाद्य पदार्थों में यह सबसे अद्भुत और प्रभावी रक्त-शुद्धिकारकों में से एक है। लगभग एक सौ पच्चीस वर्ष पहले टमाटर को विषैला समझा जाता था। कई लोग इसे अम्ल बनानेवाला आहार समझते थे, जो रक्त एवं शरीर की कोशिकाओं की अम्लीयता में वृद्धि कर सकता है। ऐसा समझा जाता था कि इसका कोई आहार मूल्य नहीं है और यह भोजन को केवल रंगदार एवं सुस्वादु बनाता है। रसायनशास्त्र के नवीनतम शोधों ने टमाटर के बारे में उन आधारहीन विचारों को पूरी तरह से दूर कर दिया है।आये जानते है टमाटर के फायदे |

टमाटर का प्रथम स्थान अमेरिका है। वहाँ से इसे यूरोप लाया गया। लेकिन कई सौ वर्षों तक इसे केवल बगीचे की शोभा के रूप में लगाया जाता रहा। तब इसे ‘लव एप्पल’ कहा जाता था। सन् 1860 में यह पता चला कि टमाटर भी आहार के रूप में उतना ही अच्छा है जितना अन्य फल या साग-सब्जियाँ। इस खोज के बाद यह धीरे-धीरे सारे संसार में बहुत लोकप्रिय हो गया। अब फलों व साग-सब्जियों में इसका उच्च स्थान है और इसे बड़े पैमाने पर उगाया जाता है।

टमाटर-के-फायदे

टमाटर का वैज्ञानिक नाम : लाइकोपर्सिकॉन एस्क्यूलेन्टम (Lyscopersicon esculentum)

प्रकृति : न गर्म न ठण्डा।

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औषधीय गुण

विटामिन्स : टमाटर में विटामिन ए०बी०सी० (A. B.C.) इतनी अधिक मात्रा में मिलते हैं जितने सन्तरा और अंगूर में नहीं मिलते। यह सन्तरा और अंगूर से भी ज्यादा लाभदायक है। इसमें पाये जाने वाले विटामिन गर्म करने से नष्ट नहीं होते। टमाटर में विटामिन ‘ए’ अधिक पाया जाता है। प्रतिदिन चार लाल टमाटर खाने से शरीर को जितने विटामिन ‘ए’ की आवश्यकता होती है, मिल जाती है। टमाटर में विटामिन ‘सी’ प्रचुर मात्रा में मिलती है जो शरीर में विद्यमान विजातीय तत्वों को निकालती है। टमाटर में रिवोफ्लोविन पाया जाता है जो किवा काम्प्लेक्स का ही रूप है।

प्रति 100 ग्राम टमाटर में 0.9 ग्राम प्रोटीन, 0.2 ग्राम वसा, 3.6 ग्राम कार्बोहाइड्रेट आदि पोषक तत्व होते हैं। प्रति सौ ग्राम टमाटर से शरीर 20 कैलोरी ऊर्जा प्राप्त करता है।

टमाटर के फायदे अति उत्तम पौष्टिक और स्वास्थ्यवर्धक गुणों से भरपूर है । इसमें 3.1 प्रतिशत कार्बोहाइड्रेट है। मुख्यतया यह ‘इन्वर्ट शुगर’ के रूप में है, जो कि कार्बोहाइड्रेट का पहले से ही पचा हुआ रूप है। इसमें स्टार्च बहुत कम मात्रा में पाया जाता है, क्योंकि पकने की क्रिया में शक्कर मुख्यतया डेक्सट्रोस (द्राक्षा शर्करा) में परिवर्तित हो जाता है। इसमें 0.1 प्रतिशत प्रोटीन और 0.2 प्रतिशत वसा भी होती है। टमाटर विटामिन ‘ए’, ‘बी’ तथा ‘सी’ और कई उपयोगी अम्लों का प्रचुर स्रोत है। खासतौर से इसमें विटामिन ‘ए’ प्रचुर मात्रा में पाया जाता है और प्रति 100 ग्राम भाग में 1000 अन्तर्राष्ट्रीय इकाई पाई जाती है | सुखा टमाटर भी विटमिन  ‘ए’ का अच्छा स्रोत है। विटामिन ‘सी’ भी इसमें पर्याप्त मात्रा में होता है। मध्यम आकार के एक टमाटर में विद्यमान विटामिन ‘सी’ पकने या डिब्बाबंदी करने पर भी लगभग पूरा शेष रहता है।

तत्त्वतः टमाटर एक क्षारीय शाक है। इसका अम्लीय स्वाद मेलिक एसिड के फलस्वरूप है, जो कि लगभग 0.5 प्रतिशत है। इसमें 0.52 से 18 प्रतिशत साइट्रिक एसिड और ऑक्जेलिक एसिड का सूक्ष्म अंश पाया जाता है। शरीर द्वारा ऑक्सीकृत होने की प्रक्रिया में यह क्षारीय भस्म छोड़ता है। यह रक्त की क्षारीयता में वृद्धि और पेशाब की क्षारीयता में कमी करता है तथा शरीर के फॉस्फेट, यूरिया एवं अमोनिया जैसे अम्लीय यौगिकों को निष्क्रिय बनाता है।

टमाटर सुडौल और जितना मोटा हो, उतना ही अच्छा होता है। इसे कच्चा, उबाल कर रस निकल कर,सूप बना कर खाया जाता है | टमाटर भूके पेट खाना अच्छा है| इसके बाद एक घण्टे तक कुछ नहीं खाना चाहिए। टमाटर के सिरों (जहाँ पौधे से जुड़े रहने का डाँड होता है) पर मोम लगा कर ठंडे पानी में रखें। इससे कई दिनों तक टमाटर ताजे रहते हैं।

चूना (Lime) : चूना टमाटर में अन्य फल-सब्जियों की अपेक्षा अधिक पाया जाता है। चूना हड्डियों को मजबूत बनाता है। दाँतों एवं हड्डियों की कमजोरी दूर करने के लिए टमाटर का सेवन उपयोगी है।

लोहा (Iron) : इसमें लोहा तत्व बहुत अधिक परिमाण में पाया जाता है। गर्भावस्था में  लोहा तत्व की प्रतिदिन आवश्यकता होती है। टमाटर का सेवन इसलिए लाभदायक है। टमाटर में लोहा अण्डे से पाँच गुना अधिक होता है। एक गिलास टमाटर का रस पीने से रक्तहीनता दूर होकर रक्त-वृद्धि होती है।

कब्ज़ : नित्य 50 ग्राम कच्चा टमाटर खाने से दूर होती है।

पाचन-शक्तिवर्धक : यह बड़ी आँत को ताकत देता है. आँखों के घाव दूर करता है एवं पाचन-शक्ति ठीक करता है। टमाटर का निरन्तर सेवन करने से कब्ज नहीं होती तथा दस्त साफ होता है; आफरा दूर होता है। आमाशय साफ रहता है। आमाशय के विष को बाहर निकाल कर हमें निरोग रखता है। योरोप तथा अमेरिका में दूध पीने वाले बच्चे को टमाटर की रस पिलाया जाता है।

उण्डुकपुच्छशोथ (Appendicitis) में 100 ग्राम लाल टमाटर पर सैंधा नमक अदरक डालकर भोजन से पहले खाने से लाभ होता है।

कृमि-नाशक : भूखे पेट लाल टमाटर, काली मिर्च, नमक मिलाकर खाने से कृमि मर जाते हैं।

छाले : (1) जिसे बार-बार छाले होते रहते हैं, उसे टमाटर अधिक खाना चाहिए। छालो  के लिए टमाटर ओषधि का काम करता है। (2)टमाटर का रस पानी में मिलाकर कुल्ले करने से छाले मिट जाते हैं।

शक्ति-वर्धक : प्रातः काल नाश्ते में एक गिलास टमाटर के रस में थोड़ा शहद मिलाकर पीया जाये तो चेहरा टमाटर की तरह लाल निकल आयेगा। टमाटर यकृत, फेंफड़ों को शक्ति देता है, स्मरणशक्ति बढ़ाता है। रक्त चाप (Blood Pressure) को घटाता है। यह दस्त साफ़ लाता है। मोटापा रोकता है। चर्म रोगों से बचाता है।

मोटापा कम करने में : जिनका भार अधिक है व अन्नाहार पर नियन्त्रण करते हैं; व्यायामों और योगासनों पर ध्यान देते हैं। – टमाटर के फायदे उनके लिए हितकारी है क्योंकि यह शरीर से विजातीय द्रव्य,पदार्थ व आँतों में रुका, अटका खाना शरीर से बाहर निकालने में पूरी मदद करता है। नित्य कच्चा टमाटर नींबू, नमक, और प्याज के साथ खाने से आप विश्वास करें आपका बढ़ा भार धीरे-धीरे कम होने लगेगा।

पीलिया : टमाटर के रस का एक गिलास नित्य पीने से पीलिया ठीक हो जाता है।

जीभ का मैलापन : 100 ग्राम लाल टमाटर पर सैंधा नमक डालकर खाने से जीभ का मैलापन दूर होता है।

कमजोरी : इसका सूप भूख बढ़ाता है; रक्ताल्पता दूर करता है; थकावट-कमजोरी दूर करता है और चेहरे पर रौनक लाता है।

ज्वर : ज्वर में रक्त में हानिकारक पदार्थ बढ़ जाते हैं। टमाटर का सूप इन पदार्थों को निकाल देता है। इससे रोगी को आराम मिलता है। यह सामान्य ज्वर में ही देना चाहिए।

चर्म रोग : टमाटर खट्टा होता है। टमाटर की खटाई रक्त साफ करती है। रक्तशोधन के लिए टमाटर अकेले ही सेवन करना चाहिए अर्थात् किसी अन्य वस्तु के साथ नहीं लेना चाहिए। नींबू में भी इसी प्रकार के गुण हैं। रक्त-दोष से जब त्वचा पर लाल चकत्ते उठे हों, मुंह की हड्डियाँ सूज गई हों, दाँतों से रक्त निकलता हो, स्कर्वी रोग की सम्भावना हो, रक्त-विकार, दाद, बेरी-बेरी हो, टमाटर का रस दिन में 3-4 बार पीने से लाभ होता है। यह रक्त साफ करता है। कुछ सप्ताह नित्य टमाटर का रस पीने से चर्म रोग ठीक हो जाते हैं।

चर्म :कच्चा टमाटर खाने से त्वचा की खुश्की दूर होती है। यह गर्मी दूर करता है इसलिए इसे गर्मी में भी खायें। जिन सब्जियों की प्रकृति गर्म होती है, उनमें टमाटर डाल कर खाने से उनकी प्रकृति बदल जाती है, शीतल हो जाती है।

ज्वर : टमाटर गर्मी दूर करता है। ज्वर में टमाटर सेवन करने से ताप कम होता है।

खुजली : टमाटर का रस एक चम्मच, नारियल का तेल दो चम्मच मिला कर मालिश करें फिर गर्म पानी से स्नान करें। खुजली मिट जायेगी।

मधुमेह : इसके लिए टमाटर के फायदे बहुत लाभदायक है। टमाटर की खटाई शरीर मे शर्करा की मात्रा घटाती है। मूत्र में शक्कर जाना धीरे-धीरे कम हो जाता है। प्रमेह में भी यह उपयोगी है। होम्योपैथिक ओषधियों से चिकित्सा करने के लिए पुस्तक ‘होम्योपैथिक व्यावहारिक चिकित्सा सार’ पढ़ें।

सूखा रोग : टमाटर का सेवन बच्चों के सूखा रोग में लाभदायक है। बच्चे को कच्चे लाल टमाटर का रस चार बार नित्य एक माह पिलाने से बच्चा हृष्ट-पुष्ट हो जाता है। इसके अतिरिक्त शरीर की स्थूलता, पेट के रोग, अतिसार, पीलिया, प्रदर आदि रोगों में टमाटर के फायदे लाभदायक है।

दाँत : टमाटर खाने से दाँत मजबूत होते हैं।

शिशु-शक्तिवर्धक : शिशु की माताएँ टमाटर खायें और शिशु को टमाटर का रस नित्य पिलायें। इससे शिशुओं का शारीरिक विकास अच्छा होता है, पाचन-शक्ति अच्छी रहती है तथा दाँत सरलता से आते हैं।

श्वास, दमा आदि में : टमाटर के फायदे मुख्यतया क्षारीय होने से एसिडोसिस, समय पूर्व वृद्धावस्था और कई अन्य बीमारियों में, जो कि तंत्र में बहुत अधिक अम्ल होने के फलस्वरूप होता है, के लिए उत्कृष्ट इलाज है। ब्रोंकाइटिस (श्वास नलिकाओं काशोथ) और दमे में भी आराम पहुँचाता है। यह गुरदे को सौम्य व प्राकृतिक रूप से उत्तेजित करने का कार्य करता है। यह विष को भी बाहर निकालने में सहायक होता है, जो बीमारियाँ पैदा करता है और हमारे तंत्र को संदूषित करता है। यह स्नायु टॉनिक भी है।

बदहजमी : यह सुस्त लीवर को उत्तेजित करता है और शक्तिहीन बदहजमी में आराम पहुँचाता है। यह उन लोगों के लिए बहुत उपयोगी है, जो पित्त रोग से ग्रस्त हैं, क्योंकि यह पित्त के प्रवाह में तेजी लाता है।

कब्ज-नाशक : टमाटर थोड़ा सा जुलाब देनेवाला (दस्तावर) भी है, खासतौर से जब इसे कच्चा खाया जाए। अतः यह कब्ज में उपयोगी है।

मधुमेह : इसमें कार्बोहाइड्रेट अधिक मात्रा में होने से मधुमेह के रोगियों के लिए यह अच्छा आहार है और उन लोगों के लिए भी, जो अपना वजन कम करना चाहते हैं।

नेत्र-विकार : विटामिन ‘ए’ का प्रचुर स्रोत होने से रतौंधी, निकट दृष्टि और विटामिन की कमी से आँख में होनेवाली अन्य बीमारियों में यह विश्वसनीय रूप से रोधात्मक है।

स्कर्वी रोग : विटामिन ‘सी’ प्रचुर मात्रा में होने से यह स्कों में भी उपयोगी है। ताजे टमाटर ताजगी देनेवाले और भूख बढ़ानेवाले होते हैं।

सामान्य उपयोग

भोजन की विविधता बढ़ाने के लिए टमाटर को पकाया, सेंका या भाप दी जा सकती है। यह मिश्रित सब्जी बनाने के लिए अन्य सब्जियों के साथ अच्छी मिल जाता है। वैसे अधिकतर लाभ प्राप्त करने के लिए टमाटर को सलाद के रूप में सेवन करना चाहिए।

टमाटर का रस संभवतः सूप के रूप में अत्यधिक मात्रा में उपयोग में लाया जाता है। ताजे कच्चे टमाटर अत्यधिक हितकारी होते हैं। बच्चों के लिए यह संतरे के रस से ज्यादा अच्छा समझा जाता है। बच्चों की प्रतिदिन की खुराक में टमाटर का रस बच्चों की बाढ़, शरीर की कट-फट और विटामिनों की कमी से होनेवाले रोगों को रोकने में सहायक होता है। एक साल के बच्चे को टमाटर का रस दिन में तीन बार चम्मच भर देना पर्याप्त है। उम्र के साथ इसे बढ़ाया जा सकता है।

सावधानी

टमाटर खाने के बाद पानी न पीयें। टमाटर में तेजाबी अंश होता है जो पेट साफ रखता है। टमाटर खाकर पानी पीने से यह तेजाबी अंश नष्ट हो जाता है। तेज खाँसी में कच्चा टमाटर लेना हानिकारक है। पथरी के रोगी को टमाटर का सेवन नहीं करना चाहिए। टमाटर के साथ शक्कर का प्रयोग लाभकारी है। संधिवात ग्रस्त, माँस पेशियों में दर्द, कहीं सूजन हो तो टमाटर का सेवन नहीं करना चाहिए।

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