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Menstruation Hygiene Tips: बदलते वक्त के साथ महिलाओं ने भी अपनी सेहत और रहन-सहन के तरीके में कई तरह के बदलाव महसूस किए। महिलाओं के बीच सेहत से जुड़ा सबसे बड़ा बदलाव पीरियड्स के दौरान इस्तेमाल होने वाले कपड़े की जगह सेनेटरी पैड्स को जगह देना था। पीरियड्स महिलाओं के जीवन का एक महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। यह एक नेचुरल प्रोसेस है, जो हर महीने लड़कियों को होता है। पीरियड्स में होने वाली ब्लीडिंग को रोकने के लिए लड़कियां कॉटन पैड्स (सेनेटरी पैड्स) का इस्तेमाल करती हैं। हालांकि सैनिटरी पैड खरीदना ही खुद के स्वास्थ्य की देखभाल करना नहीं होता है। इसे खरीदते समय कुछ खास बातों का ध्यान भी  रखना जरूरी होता है। आइए जानते हैं क्या हैं वो बातें। 

सैनेटरी पैड्स खरीदते समय किन बातों का रखें ध्यान-
हाइजीन-

सैनेटरी पैड्स के इस्तेमाल से जुड़े सभी नियमों का पालन करें। जैसे- पीरियड्स के दौरान हर चार से छह घंटों के बीच सैनेटरी पैड्स बदलें। इस दौरान इस बात का पूरा ध्यान रखें कि आप जिस पैड का इस्तेमाल कर रही हैं वो किस क्वालिटी का है और क्या इसका इस्तेमाल करना आपके लिए पूरी तरह से हाइजिनिक होगा या नहीं। दूसरा, कुछ महिलाएं एक ही पैड को लंबे समय तक इस्तेमाल करती हैं। ये खतरनाक हो सकता है, क्योंकि कुछ पैड्स सिर्फ वन टाइम यूज के लिए बनाए जाते हैं अगर आप उसे ज्यादा टाइम तक इस्तेमाल करती हैं तो बैक्टीरियल इन्फेक्शन होने कि सम्भावना ज्यादा बनी रहती है।

क्वालिटी का रखें ध्यान-
सैनेटरी पैड्स खरीदते समय सबसे पहले उसकी क्वालिटी का जरूर ध्यान दें। कई बार महिलाएं कम पैसों में मिलने वाले कोई भी सेनेटरी पैड्स खरीद लती हैं। जो आगे चलकर उनकी सेहत को नुकसान पहुंचा सकते हैं, ऐसा ना करे। पैड खरीदते समय ध्यान रखें कि नैपकिन कॉर्न स्टार्च और बैंबू फाइबर से बने हुए हों। 

खूशबू से बचें-
बाजारों में आजकल ग्राहकों को अपनी तरफ आकर्षित करने के लिए खूशबू वाले पैड्स भी निकाले गए हैं। हालांकि, जिन्हें खरीदने से पहले आपको काफी विचार करना पड़ सकता है। ध्यान रखें, सुगंध वाले सैनेटरी पैड खरीदने से बचना चाहिए। इनमें  ऐसे रसायन हो सकते हैं, जो बाद में त्वचा में दाने होने का कारण बन सकते हैं। इसलिए हमेशा सुगंध रहित पैड ही खरीदें। अगर आप कम समय में ही पैड बदल लेती हैं तो आप बदबू की स्थिति से भी बची रहेंगी। 

पर्यावरण पर असर-
सेनेटरी पैड्स खरीदते समय हमेशा ऐसे पैड का चुनाव करें जिन्हें आसानी से डिस्पोज किया जा सकता है। जो सेनेटरी पैड आसानी से डिस्पोज नहीं हो पाते वह हमारे साथ-साथ वातावरण को भी नुकसान पहुंचाते हैं। सिंथेटिक पैड्स को खरीदने से बचें। इसकी जगह बायोड्रिग्रेडेबल पैड्स का इस्तेमाल करें। यह आपके साथ-साथ वातावरण के लिए भी सेफ हैं।

साइज का रखें ध्यान-
अक्सर महिलाएं पैड खरीदते समय इनके साइज का ध्यान नहीं रखती हैं। ये बहुत जरूरी है। साइज के सही नहीं होने पर फिटिंग की समस्या हो सकती है। ध्यान रखें, पहली बार पीरियड्स आने पर आप रेगुलर साइज के नैपकिन या टैम्पून का इस्तेमाल कर सकती हैं। अगर रेगुलर नैपकिन जल्दी भर जाता है, तो एक लंबा पैड इस्तेमाल करें।अगर कुछ घंटों बाद ऐसा लगता है कि नैपकिन पर ज्यादा ब्लड नहीं है, तो आप एक रेगुलर साइज के पैड या टैम्पून का इस्तेमाल कर सकती हैं।

समय का भी रखें ध्यान-
नाइट पैड पीछे की तरफ से ज्यादा लंबे और चौड़े होते हैं, ताकि सोते समय इनके  हिलने डुलने की संभावना कम रहे और ये आपको पूरी तरह से सुरक्षा दें सके। कई बार रात के समय रेगुलर पैड यूज करने से लड़कियों की नींद खराब हो जाती है। ऐसे में कोशिश करें कि पैड के डिफरेंट टाइप को समझ कर उसका इस्तेमाल अलग-अलग समय के अनुसार करें। 

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