कुछ लहसुनों में एक ही कलि होती है। इसे अंग्रेजी में शैलोट (Shellot) कहते हैं। यह सबसे अच्छा और सबसे गुण कारी लहसुन होता है। किसी लहसुन में एक मोटी गाँठ होती है, जिसमें दस, पन्द्रह कालिया होती हैं। यह एक कालिया लहसुन से मध्यम किन्तु फिर भी श्रेष्ठ होता है। लहसुन मिट्टी के सूखे घड़े में रखें तो खराब नहीं होता है। तो आये जानते है लहसुन के फायदे |

लहसुन का वैज्ञानिक नाम : Allium sativum

लहसुन-के-फायदे

लहसुन के लाभ ( Garlic Benefits In Hindi )

            लहसुन खाने से भूख अच्छी लगती है। शरीर में गर्मी, चेहरे पर चमक रहती है, कृमि नष्ट होते हैं। इसे नित्य खाने से रोगों से बचाव होता है तथा रोग होने पर विशेष विधि से खाने से रोग दूर होता है। लहसुन उत्तेजक और चर्मदाहक होता है। लहसुन का प्रभाव सारे शरीर पर होता है। यह रक्त, ताकत और वीर्य बढ़ाने वाला होता है। सम्भोग-शक्ति बढ़ाता है। टूटी हड्डियों को जोड़ता है। मेधा शक्ति तथा नेत्रों के लिए हितकर है। यह हृदयरोग,जीणं ज्वर, शूल, कब्ज, वायुगोला, अरुचि, खाँसी, सूजन, बवासीर, कुष्ट, अग्निमांद्य, श्वास और ‘कफ को नष्ट करता है। यह अधिक पेशाब लाता है, पेट के आफरे को दूर करता है। यह सूजन, पक्षाघात, जोड़ों का दर्द, तिल्ली में लाभदायक है। कटिवात, प्यास, दाँतों की सड़न को। दूर करता है। रोग के कीटाणुओं का नाश करता है। 

लहसुन के नुकसान ( Side Effects Of Garlic In Hindi )

लहसुन खाने के बहुत सारे फायेदे तो है लेकिन कुछ नुकसान भी होते है जो स्वास्थ्य के लिए कुछ दुष्प्रभाव दाल ते है जिनका ज्ञान सही प्रकार ना होने पर नुकसान भी छेल ना पड सकता है उन नुकसानो से बचने के लिए आवश्यक है। लहसुन के साइड इफेक्ट्स को अच्छे तरह से जानने के लिए कुछ बातो को जाने

   लहसुन की तासीर गर्म होती है। इसलिए सीमित मात्रा में इसका उपयोग करना चाहिए। गर्मियों में इसका उपयोग कम ही करना चाहिए क्योकि यह गर्म होता है। और गर्म तासीर की वजह से ही आम-तौर पर इसे सर्दियों में उपयोग करने की सलाह दी जाती है। इसका अत्यधिक उपयोग करने से पेट की कई समस्याएं हो जाती हैं। अगर किसी को इसका दुष्प्रवाभ हो जाता है तो उस व्यक्ति को धनिया, नींबू, पुदीना आदि लेने की सलाह दी जाती है। कई मामलों में देखा गया है की इसमें सल्फर मौजूद होने की वजह से लोगों को इससे एलर्जी हो जाती है जिससे कई समस्याएं हो सकती हैं इसलिए जिन लोगों को इससे एलर्जी जैसा महसूस हो या जो इससे एलर्जिक हों, वो इसका सेवन न करें।

  • लहसुन का सेवन करने से आपके मुंह से दुर्गन्ध आ सकती है।
  • लहसुन खाने से पेट फूलना, गैस, खराब पेट, गन्दी सांस और शरीर की गंध जैसे समस्या पैदा करता है। यदि आप पेट या पाचन की समस्या से जूझ रहे है तो सावधानी के साथ लहसुन का उपयोग करें।
  • यह एक स्कन्दनरोधी (रक्त-पतला करने वाला) के रूप में कार्य करता है और रक्त पतला करने वाली दवाओं से हस्तक्षेप कर सकता है।  
  • लहसुन का सेवन गर्भवती महिलाओं को नहीं करना चाहिए।
  • लहसुन का सेवन करने से पहले एक बार डॉक्टर की सलहा ज़रूर ले।
लहसुन से उपचार ( Garlic Treatment In Hindi )

दमा :  लहसुन के रसको गर्म पानी के साथ देने से श्वास, दमा में लाभ होता है। लहसुन की एक कली भूनकर दो रत्ती नमक मिलाकर दो बार खाने से | श्वास में लाभ होता है। एक कप गर्म पानी में दस बूँद लहसुन का रस, दो चम्मच शहद नित्य | प्रातः दमा के रोगी को पीना लाभदायक है। इसे दौरे के समय भी पी सकते हैं।

प्लुरिसी : यदि फेफड़े के पर्दे में पानी भर गया हो,ज्वर हो, साँस रुक कर आता हो, छाती में दर्द हो तो लहसुन पीसकर गेहूँ के आटे में मिला कर गर्म-गर्म पुल्टिस बाँधे।

क्षय (टी-बी) :लहसुन खाने वालों को टी-बी रोग नहीं होता। इसके प्रयोग से टी-बी के कीटाणु नष्ट हो जाते हैं। टी-बी रोग के लिए लहसुन एक वरदान है। हर प्रकार के टी-बी को दूर करने के लिए लहसुन अमृत से कम नहीं है। लहसन में सल्फ्यूरिक ऐसिड अच्छी मात्रा में होता है। जो टी-बी के कीटाणुओं को नष्ट करता है।

टी-बी होने पर 250 ग्राम दूध में कटी हुई दस कली लहसुन की उबाल कर खायें, ऊपर से उस दूध को पीयें। लम्बे समय तक पीते रहने से टी-बी ठीक हो जाता है। फेफड़े के टी-बी में लहसुन के प्रयोग से कफ गिरना कम होता है, रात को निकलने वाले पसीने को रोकता है। भूख बढ़ाता है और नींद सुखपूर्वक लाता है।

फेफड़ों में टी-बी होने पर लहसुन के रस से रूई तर करके सूंघना चाहिए ताकि श्वास के साथ मिलकर इसकी गन्ध फेफड़ों तक पहुँच जाय। इसे बहुत देर तक सूंघते रहना चाहिए। इसकी तीव्र गन्ध ही है जो प्रबल से प्रबल कीटाणुओं, कृमियों तथा असाध्य रोगों को मिटाती है। खाना खाने के बाद लहसुन का सेवन भी करना चाहिए। यक्ष्मा, ग्रंथिक्षय, हड्डी के टी-बी में लहसुन खाना लाभदायक है।आंत्र टी-बी में लहसुन का रस 5 बूंद 12 ग्राम पानी के साथ पिलाना चाहिए।

जुकाम : जुकाम में लगातार 5-7 या अधिक छींकें आती हों तो लहसुन खाने से छीकें आनी | बन्द हो जाती हैं।

गला बैठना : गर्म जल में लहसुन का रस मिलाकर गरारे करें।

निमोनिया : में लहसुन का रस एक चम्मच गर्म पानी में मिलाकर पिलाना गुणकारी है। इससे सीने का दर्द कम होता है।

खाँसी : (1) 62 ग्राम सरसों के तेल में लहसुन की एक गाँठ को साफ करके उसमें पकाकर रख लें। इस तेल की सीने व गले पर मालिश करें। मुनक्का के साथ दिन में तीन बार लहसुन खायें। खटाई खाना छोड़ दें। (2) बीस बंद लहसुन का रस अनार के शर्बत में मिलाकर पिलायें। हर प्रकार की खाँसी में लाभ होगा। ( और पढ़े ख़ासी को कैसे करे दूर )

काली खांसी : (1) पाँच बादाम शाम को पानी में भिगो दें। सुबह छीलकर उनमें मिश्री और एक कली लहसुन की मिलाकर पीस लें और खिलायें। दो-तीन दिन में काली खाँसी ठीक हो जायेगी। बच्चे को लहसुन की माला पहनाना व इसके तेल की मालिश भी लाभदायक है। (2) लहसुन का ताजा रस दस बूंद, शहद और पानी चार-चार ग्राम, ऐसी एक-एक मात्रा दिन में चार बार दें।

खुजली : लहसुन को तेल में उबाल कर मालिश करने से खुजली में लाभ होता है। यह रक्त साफ करता है। इसका सेवन भी करना चाहिए।

दाद : दूध पीते हुए बच्चे के दाद हो जाय तो लहसुन को जलाकर इसकी राख शहद में मिलाकर लगाने से लाभ होता है।

दाँतों के रोग : पायोरिया, मसूड़ों की सूजन, दर्द, बदबू हो तो एक चम्मच शहद में बीस बँद लहसुन का रस मिलाकर चाटें। 60 ग्राम सरसों के तेल में लहसुन को पीस कर डालें और गर्म करें। जब लहसुन जल जाय तो तेल को ठंडा करके छान लें। इस तेल में 30 ग्राम जली हुई अजवाइन डालें और 15 ग्राम पिसा हुआ सैंधा नमक मिलायें। इससे मंजन करें। इससे दाँतों के सामान्य रोग ठीक हो जायेंगे। पायोरिया भी दो-तीन महीने प्रयोग करने से ठीक हो जायेगा।

गंज (Bald) : बाल उड़े हुए स्थान पर लहसुन का रस लगायें और सूखने दें। इस तरह 3 बार नित्य लहसुन का रस कुछ सप्ताह लगाते रहने से गंज के स्थान पर बाल आ जायेंगे।

जुएँ : लहसुन को पीस कर नींबू के रस में मिलायें। रात को सोते समय इसे सिर पर मलें। सवेरे साबुन से सिर धोयें। इस तरह पाँच दिन लगातार नित्य करने से जुएँ नष्ट हो जाती हैं। ध्यान रहे कि आँखों में न जाये।

मक्खियाँ भगाना : आग पर 5 कली लहसुन तथा चने की दाल के बराबर हींग डाल दें। इनके जलने की गन्ध से मक्खियाँ भाग जायेंगी।

स्तनों का ढीलापन : नियमित चार कली लहसुन खाने से दूर होता है। स्तन उभर कर तन जाते हैं।

सिर-दर्द : चाहे आधे सिर का दर्द हो-कैसा भी दर्द हो, लहसुन पीस कर कनपटी पर, जहाँ दर्द हो, लेप करने से दर्द मिट जाता है। लहसुन के लेप से त्वचा पर फफोले पड़ जाते हैं। अत: लेप करते समय सावधान रहना चाहिए। थोड़ी देरलेप करने के बाद धोकर जगह साफ कर देनी चाहिए। यदि आधे सिर का दर्द हो तो जिस ओर दर्द हो उस ओर के नथुने में दो बूंद लहसुन का रस डालें। हर दो घण्टे से दो कलियाँ लहसुन की चबा कर ऊपर से पानी पिलायें।

कान के रोग : चार कली लहसुन को एक चम्मच सरसों के तेल में उबाल कर कान में टपकाने से कान का बर्व, जख्म, पीब बहना ठीक हो जाते हैं।

बहरापन : लहसुन की आठ कलियों को एक छटाँक तिली के तेल में तलकर उसकी दो बँद कान में टपकाने से कुछ दिनों में कान का बहरापन ठीक हो जाता है।

कान बहना : एक कली लहसुन, एक तोला सिन्दूर को एक छटॉक तिली के तेल में डालकर अग्नि पर पकायें। जब लहसुन जल जाये तो तेल को छानकर शीशी भरलें। इसकी दो बंद नित्य कान में डालने से मवाद आना, खुजलाहट, कर्णनाद आदि रोग नष्ट हो जाते हैं।
 

रोहिणी (Diphtheria) : एक छटाँक लहसुन की कली चार घण्टे में चूसने से इस रोग में लाभ होता है। बच्चों को इसका रस शर्बत में मिलाकर पिलाना चाहिए। इसकी कलियों का रस बार-बार देते रहना चाहिए।

हिस्टीरिया : लहसुन का रस नाक में टपकाने से होश आ जाता है।

मिरगी : (1) मिरगी के बेहोश रोगी को लहसुन कूटकर सुँघाने से होश में आ जाता है। दस कली दूध में उबाल कर नित्य खिलाने से मिरगी रोग दूर हो जाता है। यह प्रयोग लम्बे समय तक करें। (2) लहसुन को तेल में सेक कर नित्य खायें।

जलोदर : आधा चम्मच लहसुन का रस 125 ग्राम पानी में मिलाकर पिलाने से जलोदर दूर हो जाता है। यह कुछ दिन पिलाना चाहिए।

पेट-दर्द : चार चम्मच पानी, आधा चम्मच लहसुन का रस स्वादानुसार नमक के साथ पिलाना चाहिए। इससे पेट दर्द ठीक हो जाता है।

हैजे से बचाव : रहने के स्थान पर जगह-जगह छिला हुआ लहसुन रखें। इस से हैजे के कीटाणु मर जायेंगे तथा हैजा नहीं होगा।

कृमि : पाँच कली लहसुन की मुनक्का या शहद के साथ नित्य तीन बार सेवन करने से पेट के कृमि मर जाते हैं। यह दो-तीन माह सेवन करने से स्वास्थ्य उत्तम हो जाता है।

दर्द : दो गाँठ लहसुन को पीस कर सौ ग्राम तिल के तेल में मिलाकर गर्म करके मलने से दर्द दूर हो जाते हैं।

आँब होने पर : एक कली लहसुन के साथ मूंग के बराबर अफीम खाने से आँव बन्द हो जाती है।

पाचन-क्रिया : को लहसुन से बड़ा बल मिलता है। यह अन्तड़ियों में रुकी हवा को निकाल देता है। इसके लिए चार कली प्रातः नित्य लें।

भूबावरोध : नाभि से नीचे लहसुन की पुल्टिस बाँधने से मूत्राशय की निर्बलता और मूत्र की रुकावट शीघ्र दूर हो जती है। यह अतिमूत्रल भी है।

ज्वर : तेज ज्वर होने पर लहसुन कूटकर थोड़ा जल मिलाकर पोटली बनाकर सँघायें। इससे ज्वर की तीव्रता दूर हो जाती है। लहसुन का रस 6 ग्राम प्रातः,दोपहर तथा शाम,तीन बार पिलाने से ज्वर का शमन हो जाता है।

मलेरिया : यदि मलेरिया नित्य निश्चित समय पर आता हो तो लहसुन का रस हाथ-पैरों के नाखूनों पर बुखार आने से पहले लेप करें तथा एक चम्मच लहसुन का रस, एक चम्मच तिल के तेल में मिला कर जब तक बुखार न आय, एक-एक घण्टे से जीभ पर डाल कर चूसें। इस तरह चार दिन लगातार करने से मलेरिया ठीक हो जाता है।

लकवा : (1) एक ओर के अंग में लकवा हो गया हो तो 25 ग्राम छिला हुआ लहसुन पीस कर दूध में उबालें। खीर की तरह गाढ़ा होने पर उतार कर ठंडा होने पर नित्य प्रातः खाए। 250 ग्राम लहसुन को पीस कर 500 ग्राम सरसों का तेल और दो किलो पानी लोहे की कडाही में मिला कर गर्म करें। जब सारा पानी जल जाय तो उतार कर ठंडा करें। ठंडा होने पर छान कर नित्य इस तेल की मालिश करें। इस तरह एक माह प्रयोग करने से लकवा ठीक हो जाता है। (2) सात कली लहसुन पीस कर एक चम्मच मक्खन में मिला कर खायें। यह भी लकवे में लाभ करता है।

हड्डी : हड्डी टूट गई हो, स्थान से हट गई हो, बढ़ गई हो, हड्डी का कोई भी रोग हो, लहसुन के सेवन से लाभ होता है।

अतिरक्त दाब (B.P.) : में 6 बूंदें लहसुन का रस चार चम्मच पानी में दो बार नित्य पिलायें।

हार्टफेल : जब किसी को हार्ट अटैक (दिल का दौरा) होने लगे तो चार-पाँच कलियों को तुरन्त चबा लेना चाहिए। ऐसा करने से हार्ट फेल नहीं होगा। इसके बाद लहसुन दूध में उबाल कर देते रहना चाहिए। हृदय रोग में लहसुन देने से पेट की वायु निकल कर हृदय का दबाव हल्का हो जाता है। हृदय को बल मिलता है। लहसुन में एल्लीसिन (Allicin) नामक पदार्थ पाया जाता है जो उन कीटाणुओं को नष्ट करता है जो पेनीसिलीन से नष्ट नहीं होते।

बुढ़ापा : यदि लहसुन का सेवन नियमित किया जाये तो असमय ही बुढ़ापे का शिकार होने से बचा जा सकता है। बुढ़ापे का अर्थ है शरीर की धमनियों का सिकुड़ कर रोग-ग्रस्त हो जाना। यही कारण है कि बुढ़ापे में मनुष्य के शरीर पर झुर्रियाँ पड़ जाती हैं।

स्वप्नदोष : लहसुन की एक कली दाँतों से पीसकर निगल जायें। इससे स्वप्नदोष नहीं होगा। यह प्रयोग रात को सोते समय हाथ-पैर धोकर करें।

नपुंसकता : (1) 62 ग्राम लहसुन को देशी घी में तलकर प्रति दिन खाने से नपुंसकता नष्ट होती है; काम शक्ति बढ़ती है। (2) दो सौ ग्राम लहसुन को पीसकर, छ: सौ ग्राम शहद में मिलाकर शीशी में भर कर गेहूँ के ढेर या बोरी में एक माह तक दबा दें। एक माह बाद निकालकर 15 ग्राम प्रातः व शाम को खाकर गर्म दूध पीयें। यह प्रयोग एक माह करें। बहुत लाभ होगा। इससे बल, वीर्य बढ़ेगा। (3) प्रातः पाँच कली लहसुन की चबाकर दूध पीयें। यह प्रयोग पूरी सर्दी नियम से करें। स्त्रियाँ यदि यह प्रयोग करें तो बन्ध्यत्व (बाँझपन) दूर होगा।

वात रोग : लहसुन के तेल की मालिश प्रति दिन करनी चाहिए। लहसुन की एक बड़ी गाठ को साफ करके दो – दो टुकड़े करके २५० ग्राम दूध में उबाल लेना चाहिए। इस प्रकार   तैयार की गई लहसुन की खीर 6 सप्ताह पीने से गठिया दूर हो जाता है। यह दूध रात को पीना चाहिए। खटाई, मिठाई का परहेज रखना चाहिए। दूध की खीर,लहसुन को दूध में पीसकर, उबाल कर भी ले सकते हैं। मात्रा धीरे-धीरे बढ़ाते जाना चाहिए।

घाव में कीड़े : लहसुन की दस कली, चौथाई चम्मच नमक दोनों को पीस कर देशी घी में सेंक कर घाव पर जिसमें कीड़े पड़े हों बाँधे। कीड़े मर जायेंगे तथा घाव भर जायेगा।

चोट, मरोड़ : लहसुन की 10 कलियों को नमक के साथ पीस कर उसकी पुल्टिस बाँधने से चोट और मरोड़ में लाभ होता है।

फोड़ा, जख्म : लहसुन का प्रयोग बढ़ा देने से जल्दी ठीक होते हैं। फोड़े-फुसी होने पर प्रारम्भ में ही लहसुन का लेप करना अच्छा है,मवाद पड़ने पर उपयोगी नहीं है। जिन फोड़ों में कीड़े पड़ जाते हैं उने पर लहसुन लगाने से वे अच्छे हो जाते हैं।

विष का प्रभाव : यदि किसी ने विषैली वस्तु खा ली हो और कोई उपाय सूझता न हो, प्राण संकट में हों तो लहसुन काफी मात्रा में देना चाहिए।

जहरीले कीड़े का काटना : लहसुन का रस मल देने से जहरीले कीड़े का विष नष्ट हो जायेगा।

बिच्छू का विष : लहसुन एवं अमचूर को पीसकर बिच्छु काटे स्थान पर लगा दें, आराम होगा।

पीलिया : चार कली लहसुन की पीसकर आधा कप गर्म दूध में मिला कर पीयें। ऊपर से और दूध पीयें। ऐसा प्रयोग चार दिन करने से पीलिया ठीक हो जायेगा।

जी मिचलाना : यात्रा में खान-पान की गड़बड़ से जी मिचलाने लगे तो लहसुन की कली चबाने से मिचली दूर हो जाती है।

घाव : शरीर में कहीं भी कट कर घाव हो जाये तो लहसुन को दबा कर रस निकाल कर लगाने से घाव जल्दी से ठीक हो जाता है।

शक्तिवर्धक : लहसुन की एक गाँठ के तीन हिस्से करके सुबह, दोपहर, शाम को कच्चा ही चबाने से शरीर में बल बढ़ता है, पेट की पाचन शक्ति ठीक रहती है। इसकी गन्ध और तेज जलन, चरपरेपन से डरना नहीं चाहिए। 

पेट का कैंसर : लहसुन के सेवन से पेट का कैंसर नहीं होता है। कैंसर होने पर लहसुन को पीसकर पानी में घोलकर कुछ सप्ताह पीने से पेट का कैंसर ठीक हो जाता है। खाना खाने के बाद तीन बार नित्य लहसुन लेने से पेट साफ रहता है। यह पेट की पेशियों में संकोचन पैदा करता है जिससे आँतों को कम काम करना पड़ता है। यह यकृत को उत्तेजित करता है जिससे ऑक्सीजन एवं रक्त पेट की दीवार की सक्ष्म नालियों (Capillaries) को मिलता है।  ( और पढ़े कैंसर में क्या खाना चाहिए )

अतिरिक्त दाब (Hypertension) कृमि, वायु-प्रदूषण के रोग : अर्थात औद्योगीकरण एवं नाना प्रकार के परीक्षणों से वातावरण दूषित होकर स्वास्थ्य गिरता जा रहा है। इन सबको ठीक करने के लिए चार कली कच्चा लहसुन, खाना खाने के बाद सेवन करना चाहिए।

टॉन्सिलाइटिस : होने पर आधी गाँठ लहसुन को बारीक पीसकर गर्म पानी में मिला कर गरारे करने से लाभ होता है।

दाद, सफेद दाग (Leucoderma) : अर्थात् बालों का चकत्ता उड़ना आदि रोगों में लहसुन के आंतरिक सेवन के साथ-साथ बाहर भी लगाना चाहिए।

साँप : जिस घर में लहसुन की गाँठ रखी रहती है, वहाँ साँप नहीं रहता। अगर कहीं माँप के रहने का डर हो तो वहाँ लहसुन रख दो। साँप पास नहीं आयेगा।

सेवन-विधि : लहसुन का सेवन खाना खाने के कुछ समय बाद करें। पहले दो घूट पानी पीयें जिससे मुँह तर हो जाये, फिर बारीक पिसा हुआ कच्चा लहसुन एक मटर के दाने के बराबर जीभ पर डाल कर ऊपर से एक गिलास पानी पीयें। इसे पीने के पाँच मिनट बाद ही पेट में उत्तेजना होने लगती है। यदि उत्तेजना न हो तो समझें कि पेट बहुत खराब है। पीया हुआ पानी शीघ्र ही पेशाब से निकल जाता है। लहसुन का कच्चा ही प्रयोग किया जाये तो अच्छा है। लहसुन को सब्जी व अन्य खाद्य पदार्थों में डाल कर सेवन किया जा सकता है। घी जो कोलेस्ट्रोल बढ़ाता है, घी की सब्जी में लहसुन का छोंक देने से कोलेस्ट्रोल नहीं बढ़ता।

लगाने की विधि : लहसुन को बारीक पीस कर या रस निकाल कर प्रभावित अगों पर पाँच-दस मिनट लगायें।

सावधानी : लहसुन तीव्र जलन करने वाला और चर्मदाहक है। इसके लेप को अधिक समय रखने से छाला उठ आता है और दर्द होता है। कोमल स्वभाव के लोगों पर इसका लेप सावधानी से करना चाहिए।

गन्ध : लहुसन खाने से आने वाली गन्ध को दूर करने के लिए लहसुन को छील कर रात को पानी या छाछ में भिगो दें, फिर सवेरे खायें या सवेरे भिगों दें और शाम को उसका सेवन करें। इस प्रकार बारह घण्टे भिगोया हुआ लहसुन लेने से गन्ध नहीं आती है। लहसुन खाने के बाद सूखा घनिया चबाने से इसकी गन्ध नहीं आती। 

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