स्मरण शक्ति बढ़ाने का मंत्र


 सुखार्थी चेत त्यजेविद्याविद्यार्थी च त्येजत्सु खम।

सुखार्थिनः कुतो विद्या कुतो विद्यार्थीन:सुखम

अर्थात यदि सुख की अभिलाषा हो तो विद्या का अभ्यास छोड़ना पड़ेगा यदि विद्या अभ्यास करने की इच्छा हो तो सुख की लालसा छोड़नी होगी जो सुख चाहते हैं उन्हें विद्या नहीं मिलती और विद्या चाहनेवाले को सुख सुविधा नहीं मिलती (चाणक्य नीति दर्पण 10/3) 

            स्मृति को बनाये रखना ही स्मरण शक्ति है और इसके लिये जरूरी है पुनरावृत्ति करना, बार-बार अभ्यास करना. फालतू सोच विचार, चिन्ता, ज्यादा बोलने फालतू बातें करने, झूठ बोलने या बहानेबाजी तथा व्यर्थ के कामों में उलझे रहने से स्मरण शक्ति नष्ट होती है. 

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स्मरण शक्ति अच्छी और तेज करने के उपाय इस प्रकार है.

1.शंखाहुली (शंखपुष्पी) का पंचाग (पांचों अंग) कूट पीसकर छानकर महीन चूण करके शीशी में भर लें. रात को सोते समय बादाम की 2 गिरी और 4 मगज (तरबूज, खरबूज, पतली ककड़ी और मोटी खीरा ककड़ी के बीजों को 4 मगज कहते हैं)5-5 ग्राम, 2 पिस्ता, 1 छुहारा, 4 छोटी इलायची, 1 चम्मच मक्खन और 1 गिलास दूध 5 ग्राम सौंफ.            

                बादाम, पिस्ता, छुहारा और चारों मगज 1 कप पानी में डालकर रात भर रख दें. प्रात:काल बादाम का छिलका हटाकर पत्थर पर पानी डालकर घिस लें और लेप कटोरी में उतार लें. समस्या होमवर्क की पिस्ता व छुहारे को बारीक काटकर पीसकर इस लेप में मिला लें. चारों मगज के साथ इलायची के दाने कूटकर मलीदा करके खायें 3 ग्राम शंखहुली का महीन चूर्ण मक्खन में मिलाकर चाट लें, ऊपर से 1 गिलास मीठा दूध कुनकुना गर्म करके 1-1 चूंट करके पी लें. अंत में सौंफ मुंह में डालकर इस तरह चबायें कि 15-20 मिनिट तक मुंह में रहे और आप इसका रस चूसते रहे. बाद में निगल जाये. 

               यह प्रयोग विद्यार्थियों के लिये दिमागी ताकत, तरावट और स्मरण शक्ति बढ़ाने के लिये बेजोड़ है. यह शरीर में शक्ति स्फूर्ति पैदा करता है. 40 दिन प्रतिदिन सुबह नित्य कर्मों से निवृत्त होकर खाली पेट इसका सेवन करके चमत्कार देख लें2 घंटे बाद भोजन करें. सभी सामग्री कच्ची दवा बेचने वाली या पसारी को दूकान से इकठ्ठा ले आयें. एकमात्र स्थान वैद्यनाथ आयुर्वेद भवन या पटेल किराना स्टोर्स गांधी चौक सदर से प्राप्त हो सकेगा. 15-20 मिनट का समय देकर प्रतिदिन तैयार कर सेवन करें. इस प्रयोग को आप 40 दिन से भी ज्यादा जब तक चाहें सेवन कर सकते हैं. 

अंत में यही कहना मुनासिब होगा कि

‘रंज से खुगर हुआ, इन्सां तो मिट जाता है,

मुश्किलें इतनी बड़ी मुझपे कि आसा हो गई.

                जब अच्छा अभ्यास हो जाता है तब मुश्किल से मुश्किल काम भी सरल मालूम होता है. अर्थात मनुष्य जब दुख सहने का आदि हो जाता है तब उसे दुख का अनुभव नहीं होता, इसी प्रकार बार-बार मुश्किलों का सामना करते रहने से उनका इतना अभ्यास हो जाता है कि फिर मुश्किल काम भी आसान हो जाता है.

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